Open Letter to Kejriwal from the Engineer who sent him Bangles to Wear

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माननीय श्री केजरीवाल साहब !

पिछले 2 वर्षों से आप भारत सरकार के हर छोटे-बड़े मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं, चाहे उस मुद्दे से

आपका कोई सम्बन्ध हो, या न हो ! फिल्म उड़ता पंजाब के निर्देशक, श्री अनुराग कश्यप के द्वारा बड़ी

उदारतापूर्वक साफ़ शब्दों में दो टूक मना करने के उपरान्त भी आप उनके और श्री पहलाज निलनी के

मतभेद में टांग उड़ाते (अड़ाते) जा रहे हैं |

यह बात आपको पसंद हो या न हो, पर जिस बाबासाहब आंबेडकर कि याद में आपने परसों ही 100 सीटों

वाले मेडिकल कॉलेज बनाया है, उन्हीं के द्वारा रचित संविधान के अनुच्छेद 191, खंड (1) के अनुसार यदि

आपके “बेचारे MLA” किसी भी राज्य के सरकारी दफ्तर में कार्यरत हैं, तो उस “बेचारे” की सदस्यता

तत्काल प्रभाव से रद्द हो जाती है |

आपको अराजकता का शौक है, पर बता दूँ कि आम आदमी पार्टी जितने चाहे “Secretary” नियुक्त कर

सकती है, पर “Parliamentary Secretary” के जिस पद पर आपने अपने 21 “बेचारों” को नियुक्त किया है,

उस पद पर केवल एक ही “बेचारे” नियुक्ति का संवैधानिक प्रावधान है |

मैंने आपके “बेचारों” की गणना की – 67 बेचारों में से एक बेचारे आप, आपके मंत्रिमंडल में 6 बेचारे, और

21 बेचारे ये, जिनपर तलवार लटक रही है | बेचारे जीतेंद्र सिंह तोमर साहब तिहाड़ में हैं | बाकी बचे 38

बेचारों को आपने असंवैधानिक रूप से दिल्ली के अस्पतालों के चेयरमैन नियुक्त किया है | उसका भी कोई

संवैधानिक प्रावधान नहीं है |

महज़ 2 लाख रुपये महीना पाने वाले आपके “बेचारे” MLA सरकारी गाड़ियों में अपने पैसों से तेल क्यों

भरवाते हैं, मेरी समझ में नहीं आ रही | इधर बिजली वाला “बेचारा” भारी गर्मी में South Delhi का

पसीना बहा रहा है और उधर पानी वाले “बेचारे” ने कुछ इलाकों को हफ्तों तक प्यसा मार डाला !

अस्पताल वाले बेचारे के volunteers ने तो हद ही कर दी | प्रसव कक्ष में भी डॉक्टरों को हड़काते हैं | इस

सब के बाद आपके 38 बेचारों को अस्पतालों में office चाहिए, चाहे मरीजों के लिए जगह हो या न हो |

http://www.thelotpot.com/kejriwals-huge-corruption-exposed-38-mlas-given-office-space-in-hospitals-when-patients-have-none/

http://www.firstpost.com/politics/volunteers-or-vigilantes-the-perils-of-aaps-anarchic-politics-1328297.html

दिल्ली में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है, साहब ! इस बार कम लिख रहा हूँ, उम्मीद है की आप ज्यादा

समझेंगे | छोटे भाई कि हैसियत से मैं भी आपको एक छोटी सी सलाह देना चाहता था | यदि प्रधानमंत्री

बनने की महत्वाकांक्षा और मोदी के खिलाफत कि होड़ में आप इस प्रकार के गैर-कानूनी, जनविरोधी और

असंवैधानिक काम करते रहे, तो देश की जनता आपको कभी प्रधानमंत्री नहीं बनने देगी |

जाते-जाते श्री नजीब जंग साहब के विषय में कुछ बातें आपको स्मरण करवाना चाहता हूँ … दिल्ली के

उपराज्यपाल बनने से पहले श्री जंग साहब जामिया मिलिया इस्लामिया के कुलपति थे | दोनों पदों में जंग

साहब कि नियुक्ति उसी कांग्रेस पार्टी ने की थी, जिसके खिलाफ़ आप उभर के आये और फिर उन्ही के साथ

साझा सरकार बनायी | ये वही कांग्रेस्स्स पार्टी है जिसकी राजमाता की डिग्री माँगने से आप डरते हैं |

इस उपलक्ष्य में आपकी जानकारी के लिए पहले ही बता दूँ कि मैं एक “डिग्री धारी” आम आदमी हूँ और

अपनी इंजीनियरिंग की seat खुद परीक्षा लिख कर “merit” में पाई थी, किसी जिंदल के सिफारिश पर नहीं

| चाहें तो अपने आतंरिक लोकपाल से जाँच करवा लें | किसी भी प्रकार का फर्क निकलने पर FIR करवा

कर मुझे भी तोमर साहब के पास ही के किसी कमरे में डाल दें |

आपके “आतंरिक लोकपाल” के लिए प्रतीक्षारत

सदैव आपकी सेवा में प्रस्तुत

“विशाखापत्तनम इंजिनियर”

सुमित अग्रवाल

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