आज का पंचतन्त्र : माल्या भागा तब सियासत जागा .

किसी गाँव में एक सेठानी रहती थी, जिसका वहाँ बहुत बड़ा रुतबा था। सेठानी बहुत अमीर थी, क्योंकि उसका पति कभी राजा रजवाड़े के खानदान से था और बरसों से गाँव में अपना प्रभुत्व बनाये रखा था। सेठानी और उसके बेटे ने अपने यहाँ एक लकड़ी का पुतला रखा था, जिसे वो गाँव का सरपंच बनाए हुए थे। दरअसल गाँव वालों ने अपनी गरीबी और गाँव में फैले विभिन्न समस्याओं के लिए सेठानी को अपना सरपंच चुना था, लेकिन गाँव के कुछ महत्वपूर्ण लोग विद्रोह की धमकी देने लगे कि अगर गाँव की बहू घूँघट से बाहर आएगी तो वो गाँव के पंचायत का बहिष्कार करेंगे और उसे नहीं चलने देंगे।

सेठानी ने अपनी कुटिल बुद्धि से लकड़ी के पुतले को गाँव का सरपंच घोषित कर दिया और उसकी आड़ में अपने घर की तिजोरी भरती चली गयी। कुछ बरसों के बाद धीरे धीरे गांव वालों को समझ आने लगा कि उनके साथ धोखा हो रहा है। इधर सेठानी गांव वालों से रुपये पैसे और जवाहरात ठग कर एक चोर को देती रही। चोर की चोरी का किसी को भी पता नहीं चल रहा था और चोर खुले आम गांव के पुतले सरपंच के नाम पर साहूकारों से भी उधार ले रहा था।

एक समय के बाद गांव वालो ने सरपंच बदलने की मांग की, क्योंकि बीते बरसो में सेठानी ने बहुत सारे घपले कर दिए थे जिससे गाँव वाले त्रस्त हो गए थे। गांव में फिर से चुनाव हुआ और सर्वसम्मति से एक नए सरपंच को चुना गया। नए संरक्षक ने पद सँभालते ही गांव की भलाई के लिए काम करना शुरू कर दिया जिससे सेठानी और उसका मंदबुद्धि बेटा परेशान रहते थे और हमेशा इस ताक में रहते थे कि कैसे नए ईमानदार सरपंच के ऊपर कीचड़ उछाला जाये। सरपंच ने भी पूरा ध्यान गांव की उन्नति, खुशहाली में लगाया और सेठानी के काली करतूतों को पर्दाफाश एक एक करके करने लगा। तब तक चोर अपनी अय्याशी में डूबा हुआ था लेकिन धीरे धीरे सबको उसका असली चेहरा दिखने लगा।

नए सरपंच को भी चोर का पता चला लेकिन सेठानी को बेनकाब करने में वो बहुत तल्लीन था और इसलिए उससे चोर को पकड़ने में लापरवाही हो गयी। इस बीच चोर सारा माल लेकर गांव छोड़कर भाग खड़ा हुआ और सारे साहूकार समेत सरपंच भी समय रहते चोर को नहीं पकड़ने की गलती को लेकर पछताने लगे।

अब सेठानी और उसके मंदबुद्धि बेटे को मौका मिल गया और तमाम चोरी अपने कार्यकाल के दौरान करवाने के बावजूद भी वो नए सरपंच को कोसने लगी। वो गांव वालों को भड़काने लगे कि नया सरपंच लापरवाह है जिसने चोर को जाने दिया। इस मुद्दे को लेकर गांव वालों में अब कानाफूसी जारी है और अपने ठगे जाने पर सारे साहूकार बहुत निराश हैं।

इस कहानी का विजय माल्या से पूरा संबंध है और बाकि के किरदार आप अपने हिसाब से बिठा लीजिये।

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