उत्तर प्रदेश में यादव परिवार का परिवारवाद , क्या इस बार जनता जगेंगी?

असल में किसकी है ये एंट्री – अखिलेश यादव या फिर नेता जी (मुलायम सिंह यादव) ?

पिछले कुछ दिनों में अचानक से उत्तरप्रदेश की राजनीती के सबसे सुखी परिवार में फूट पड़ने की खबर आयी । समाचर पत्रो में इसको लेकर काफी हो हल्ला मच रहा है । मगर बहुत कम ही लोग इस बात को समझेंगे की यह कोई फूट नहीं बल्कि नेता जी (मुलायम सिंह यादव) का सोचा समझ प्लान है ।

पुरे 4 साल तक, उत्तरप्रदेश में अखिलेश यादव (जो की हमारे मुख्यमंत्री होने का दावा करते है ) के अलावा सबने दिल खोल कर राज किया । उत्तरप्रदेश की गली मोहल्ले में भी पता है की उत्तरप्रदेश की सरकार में सत्ता के बहुत से केंद्र है और अखिलेश यादव सिवाय बिना आवाज़ वाली कठपुतली के और कुछ भी नहीं है । मुलायम सिंह ने 2012 में अखिलेश का चेहरा इस्तेमाल किया जिससे की सपा को गुण्डाराज वाली छवि से दूर किया जा सके और इसमें उनको सफलता भी मिल गयी ।

लोगो ने आँख बंद अखिलेश के मासूम से दिखने वाले चेहरा पर ठप्पा लगा कर सपा को जबरदस्त बहुमत दिया । मगर कट्टर सपाइयों के अलावा किसी आम आदमी से पूछे तो पिछले ४ सालो में कानून व्यवस्था की हालात पुरानी सपा सरकार की तुलना में और भी बत्तर रही है । अब अगर आप ध्यान दे तो मुख्यमंत्री अखिलेश द्वारा तथाकथित कड़े कदमो का सपा में कोई विरोध नहीं हो रहा ; ज्यादा मंत्रालय में लूट खसोट मचा कर कंगाली के स्टार पे ला खड़ा किया है; श्रीमान आज़म खान भी अपनी लंबी जुबान गले में लपेटे बैठे है।

आखिरकार 4 साल के अराजकता और सत्ता में सपाइयों की लूट खसोट के बाद अखिलेश यादव को अचानक विकास का झंडा नज़र आ गया है । अब तक विब्भिन पदों पर वो लोग बैठे थे जो अखिलेश से बिना पूछे बैठाये गए थे । अब आते है आजकल हो रही पारिवारिक उथल पुथल पर ; दरहसल ये सारा खेल नेता जी का है वो राज्य की जनता को ये दिखाना चाहते (विश्वास दिलाना चाहते ) है की ये देखो मेरा बेटा ही राज्य में सबसे ऊपर है और उस पर किसी और का दबाव नहीं है; वो खुल कर अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है ।

यह सब वही 2012 का प्लान है जो दुबारा प्रयोग में लाया जा रहा है मगर जनता को शायद अब अपनी समझदारी का जरा सा प्रयोग करना ही होगा । देखा जाये तो अब भी अखिलेश नहीं बल्कि नेता जी मुलायम सिंह यादव ही उत्तरप्रदेश की सत्ता को चला रहा है । 2012 की तरफ ही वोटरों को घूस देने की जबरदस्त तैयारी की जा रही है। उस समय मुफ्त के लैपटॉप बाटे गए और अब स्मार्ट फ़ोन देकर उत्तरप्रदेश की जनता को खरीदने का प्लान बनाया गया है । अगर उत्तरप्रदेश की जनता वाकई अपने राज्य की सूरत बदलना चाहती है तो उन्हें खाट, स्मार्ट फ़ोन और रिजर्वेशन के लालच को दबाना होगा । बाद में दुसरो को कोस के कोई फायदा नहीं है जब हम खुद सपा बसपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों के बीच झूलते रहते है। एक बार सपा चुनाव जीत जाए फिर से वही होगा जो पिछले 4 साल से हो रहा है क्या जनता जागेगी?

Comments

comments