पेलेट गन पर रोक के फैसले पर गृहमंत्री श्री राजनाथ सिंह जी को खुला पत्र

माननीय श्री राजनाथ सिंह जी को सप्रेम नमस्कार,

मेरा आपको चिट्ठी लिखने का मकसद आपको किसी प्रकार की खरी-खोटी सुनाना नहीं है और ना ही मैं आपको विभिन्न राजनीतिक पार्टियों की तरह बेबुनियाद आरोप लगाने के लिए यह चिट्ठी लिख रहा हूँ। बल्कि, मैं खुश हूँ कि मैं जिन्हें अपने देश के प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहता हुँ, वर्तमान में वही हमारे प्रधानमंत्री हैं और और मैं चाहूंगा कि आने वाले कई सालों तक हमारे देश के सर्वांगीण विकास के लिए देश के प्रधानमंत्री के पद पर उन्हीं को देखता रहूँ और आप जैसे कर्मठ और उत्कृष्ठ व्यक्तित्व के राजनितिक सहयोगियों के साथ वो हमारे देश को विकसित देशों की श्रेणी में सर्वोच्च स्थान पर ले जायें।

Rajnath-Singh_22

पिछले कुछ दिनों से कश्मीर में जो कुछ हो रहा है, उस से आप भली भांति परिचित होंगे। देश के विभिन्न कोने में घटने वाली घटनाओं को मुझ जैसे आम भारतीय मीडिया द्वारा दिखाए गए अधूरे सच के आइने से देखते हैं। विषय अच्छा हो या बुरा, मीडिया उसे मुद्दा बनाकर अक्सर नाटकीय तौर पर फ़िल्मी अंदाज़ में देश के तमाम बुद्धिजीवी वर्ग को बुलाकर वाद विवाद करती है। उसे देखकर हम देश में घट रही विभिन्न विषयों के बारे में, सही या गलत जो भी हो उसे जान पाते हैं और उसे मीडिया द्वारा दिखाए तथ्यों के आधार पर ही सच मानकर उसका आंकलन करते हैं। कश्मीर में जो कुछ भी हो रहा है उसका आंकलन भी हम मीडिया द्वारा दिखाये गए तथ्यों के आधार पर ही कर रहे हैं। लेकिन मुझे पूरा भरोसा है कि आपको वहाँ की तमाम सच्चाई पता होगी और आप देश के गृह मंत्री होते हुए एक शांतिपूर्ण और सफल हल निकालने का पूर्ण प्रयास कर रहे हैं।

वैसे भी कश्मीर की समस्या आज की तो है नहीं कि आप जादू की छड़ी घुमाएँगे और उसका समाधान निकल आएगा। जबसे चीज़ों को पहचानने की समझ आयी है, तबसे मैंने देखा है कि कश्मीर समस्या जस की तस बनी हुई है। सरकारें आती जाती है लेकिन कश्मीर मुद्दे का कोई हल नहीं निकाल पाता है। कई बार तो ख़ुद को भी समझाना पड़ता है कि कश्मीर कोई मुद्दा नहीं बल्कि हमारे देश का ही एक अभिन्न राज्य है।

आपने अपने कश्मीर दौरे के दौरान हमारे देश के जवानों और पुलिस से जो पेलेट गन का इस्तेमाल ना करने के निर्देश दिए हैं, मैं आज उस बात से आहत होकर आपको ये चिठ्ठी लिख रहा हूँ| वैसे बीते कुछ दिनों में आपके द्वारा उठाये कई कदमो से हमें आघात पहुँचा है। जैसे, हिंदुत्व का झंडा उठाने वाले आप जैसे संवेदनशील नेता को इफ़्तार खाने का दिखावा करते हुए देखना। इस सवाल का जवाब तो जनता आपसे जरूर मांगेगी कि भला ऐसा करना जरुरी था या आपके लिए भी ये वोट बैंक की मज़बूरी थी? क्योंकि आप भले इस बात से अंजान बने रहिये लेकिन आपके इफ़्तार वाले दिखावे से आपने अपने कई समर्थकों का दिल दुखाया है। मैं यहाँ अपने शब्दों के लिए अग्रिम माफी भी माँग लेता हूँ, क्योंकि मुझे राजनीतिक समझ ज्यादा नहीं है और हो सकता है आगामी चुनाव को मद्देनज़र रखते हुए आपने इफ़्तार में शामिल होने का फैसला लिया हो, परंतु दोनो ही परिस्थितियों में ये ठीक नहीं है। क्योंकि ऐसा करने से आपकी पार्टी की विचारधारा और जाति-धर्म के आधार पर लोगों को बाँटने वाली पार्टियों में क्या फर्क रह जाएगा।

आपने कश्मीर में हमारे देश के जवानों और पुलिस को पेलेट गन का इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश दे दिया। संभवतः आपने यह फैसला किसी राजनीतिक दबाव में लिया हो, पर यह हमारे देश के जवानों के साथ सरासर अन्याय है। चूँकि आपने स्वयं संसद में यह कहा है कि पेलेट गन जानलेवा हथियार की श्रेणी में नहीं आता है, तो फिर महोदय इसके इस्तेमाल पर रोक लगाने का कोई औचित्य नहीं बनता। इस बात से पूरा देश वाक़िफ है कि किस तरह मीडिया के एक विशेष वर्ग ने पेलेट गन के प्रति बीते कुछ दिनों में बढ़ा चढ़ाकर रिपोर्टिंग की है। मीडिया के इस देश विरोधी वर्ग ने पाकिस्तान की एक संस्था द्वारा लिखे हुए घटिया से लेख को ख़ूब बढ़ाचढ़ा कर दिखाया, जिसमें हमारे देश की महत्वपूर्ण हस्तियों को फ़ोटोशॉप तकनीक के ज़रिए पेलेट गन से घायल दिखाया गया था। हमें पूरा यक़ीन है देश विरोधी मीडिया के इन घटिया हरकतों से आप भली भाँति परिचित होंगे। ऐसे में यह मानना हमारे लिए कठिन है कि आपने पेलेट गन से घायल कश्मीर के भटके हुए नौजवानों के घाव को तो देखा लेकिन हमारे देश के रक्षक, हमारे भारत की शान भारतीय जवानों के ऊपर हो रहे पथराव से आप अनजान हैं। हमें यक़ीन है आप पूरी तरह वाक़िफ होंगे किस तरह अलगाववादियों द्वारा प्रायोजित तरीके से हमारी सेना के उपर पथराव होता है। अब तो इन्होंने ऐसिड बम के रूप में नया हथियार इजाद कर लिया है और हमें पूरी उम्मीद है कि आपको इस बात की भी जानकारी होगी। घाटी में हमारे देश के सैनिकों, CRPF के जवानों और पुलिस को पड़ोसी देश के दुश्मनों से ज़्यादा आज अपने ही देश के इन तथाकथित भटके हुए नौजवानों से ज़्यादा ख़तरा है। ये वो संपोले हैं जो छुपकर ऐसिड फेंकते है और भीड़ में चेहरा ढककर पत्थर फेंकते हैं। इन सब बातों से आप अनजान तो कतई नहीं होंगे। फिर आपने पेलेट गन को इस्तेमाल नहीं करने का निर्देश भला क्यों दिया?

क्या आप ये चाहते हैं कि सैनिकों के हाथ बँध जाएँ और फिर भी वो पत्थर खाकर, ऐसिड से घायल होकर घाटी की रक्षा करने की जिम्मेदारी निभाते रहे? कब तक हम इस सच्चाई से मुँह मोड़ेंगे कि जिसे हम भटके हुए युवा कह रहे हैं वो दरअसल आतंकवादी हैं। जिन्हें या तो पाकिस्तान से भेजा जा रहा है या फिर बुरहान वानी की तरह उपजे हुए आतंकी हैं। कब तक खुद को और देशवासियों की भावनाओं को यह कहकर भटकाया जाएगा की आतंक का कोई धर्म नहीं होता जबकि ये आज पूरा विश्व जनता है आतंक की मुख्य जड़ कट्टरपंथी इस्लामिक सोच है। अगर पेलेट गन जानलेवा हथियार की श्रेणी में नहीं आता तो फिर आप इसके इस्तेमाल पर किसी भी प्रकार का रोक क्यों लगाना चाहते हैं?

मीडिया ने देश को भावनात्मक रूप से यह दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी कि पेलेट गन के इस्तेमाल से भटके हुए नौजवान हमेशा के लिए अंधे हो रहे हैं। माननीय गृहमंत्री जी, अगर कोई भटका हुआ नौजवान या सीधे तौर पर आतंकवादी कह लीजिए हमारे देश को तोड़ने की कोशिश करता है और देश के रक्षकों पर आक्रमण करता है तो उसका हमेशा के लिए अंधा हो जाना ही ठीक है। देशद्रोह की इतनी सज़ा तो इन भटके हुए नौजवानों को मिलनी ही चाहिए। मैं इस विषय पर CRPF के प्रमुख द्वारा लिए फैसले से सहमत हूँ की पेलेट गन का इस्तेमाल होता रहेगा जब तक इसका कोई विकल्प नहीं निकल आता है।

आप कुछ ऐसा कदम उठाइए जिससे बुरहान वानी जैसे आतंकवादियों की अंतिम यात्रा जुलूस ना बन पाए। अगर इस सरकार ने भी सख़्त कदम नहीं उठाये तो यह समस्या वैसी ही बनी रहेगी। देश की उम्मीदें इस सरकार से ज़्यादा है, क्योंकि पहले की सरकार और अभी की सरकार में अगर कुछ अंतर लोग ढूँढते हैं तो वो इस सरकार के काम करने का अलग तरीक़ा ही है। और अगर आपलोग इस तरह से कमजोर क़दम उठाए जाएँगे तो शायद सेना के साथ देशवासियों का भी मनोबल टूटेगा।

अफजल गुरु, याकूब मेनन और बुरहान जैसे आतंकवादियों को हीरो बनाया जा रहा और लोग कर्नल महादिक और हनुमनथप्पा जैसे वीर सपूतों को भूल रहें हैं। लेकिन इन आतंकवादियो का नाम सबको क्यों याद हो जाता है? इन प्रश्नो के उत्तर ढूँढना कठिन नहीं है। देश का बच्चा भी आज इनके जवाब आसानी से बता देगा। भारतीय होने पर मुझे गर्व है और मुझे लगता है कि इन आतंकवादियो पर पेलेट गन तो क्या, गोलियों की बौछार करना भी अनुचित नहीं है। और मेरा यकीन मानिये अधिकतर लोग आपको यही कहेंगे की पेलेट गन का इस्तेमाल होते रहना चाहिए। किसी ना किसी सरकार को ठोस कदम उठाना होगा, फिर उस बदलाव का ठोस कदम आप क्यों नहीं ले सकते? सच्चाई तो यही है कि सरकार के अपने ही उठाए क़दमों से पीछे हटने की लगातार निर्णयों को ही आतंकवादियों और कश्मीरी अलगाववादियों ने कमज़ोरी समझ रखी है और इसलिए उनके हौसले बुलंद हैं।

उम्मीद है यह सरकार किसी भी प्रकार से कमजोर नहीं पड़ते हुए सख़्त कदम उठाएगी और पेलेट गन के इस्तेमाल पर रोक लगाने जैसे फैसले हमारे देश के जवानों पर जबरदस्ती नहीं थोपेगी। चाहे बिकाऊ देशद्रोही मीडिया हो या फिर किसी भी प्रकार का राजनैतिक दबाव, आपकी सरकार ठोस कदम उठाने में ज़रा भी नहीं हिचकिचाएगी।

भारत माता की जय

@01karn

Comments

comments