रवीन्द्र कौशिक : पाकिस्तानी सेना में मेजर की भूमिका निभानेवाले भारत के श्रेष्ठतम जासूस

Ravindra Kaushik

रवीन्द्र कौशिक का जन्म गंगानगर राजस्थान में  सन 1952 में एक पंजाबी परिवार मे हुआ था। एक नौजवान के तौर पर उन्हे थिएटर में काम करना पसंद था। वहीं वह भारतीय खुफिया एजेंसी RAW की नज़र मे आए। Raw अधिकारियों से उनकी पहली मुलाक़ात उनकी स्नातकता की पढ़ाई के दौरान हुई। स्नातकता के बाद वे RAW में शामिल हो गए पर किसे यह बात पता थी की ये फैसला उनकी ज़िंदगी बादल देगा।

Ravindra Kaushik
रवीन्द्र भारत के सबसे बेहतरीन जासूस बने जिन्होने पाकिस्तानी सेना मे बड़ा रुतबा हासिल किया। 23 वर्ष की उम्र मे वह रॉ के जासूस बन गए। दिल्ली में उन्हे उर्दू और मुस्लिम लेखों का प्रशिक्षण दिया गया। 1975 में उन्हे पाकिस्तान भेज दिया गया एक नयी पहचान के साथ “नबी अहमद शकीर” और भारत से उनकी पुरानी पहचान नष्ट कर दी गयी। नबी ने कराची विश्वविद्यालय मे कानून की शिक्षा प्राप्त करनी शुरू कर दी ताकि उन्हे आसानी से पाकिस्तानी सेना मे दाखिला मिल जाये और किसी को भी उनपर शक न हो जल्द ही उन्हे पाकिस्तानी सेना मे मेजर का पद प्राप्त हो गया। उसी दौरान उन्होने एक मुस्लिम लड़की “अमानत” से निकाह कर लिया और इस्लाम मे परिवर्तित हो गए । 1979 से 1983 तक उन्होने भारतीय सेना को कई अहम सूचनाएँ भेजी जो देश के लिए काफ महत्वपूर्ण और मददगार साबित हुई।

उस समय की प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गांधी ने उनके कार्यो से प्रभावित होकर उन्हे ‘The Black Tiger’ की संज्ञा दी

सन 1983 मे रॉ ने इनायत महिशा को रवीद्र कौशिक से संपर्क साधने के लिए भेजा। परंतु वो पकड़ा गया और यातनाओं के दौरान उसने रवीन्द्र कौशिक  की असली पहचान पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसी को बता दी। रवीद्र  को दो वर्षों तक पाकिस्तानी जेलों मे कड़ी यातनाएं दी गयी और उन्हे मृत्यु दंड की सजा सुनाई गयी जिसे 1985 मे उम्रक़ैद में परिवर्तित कर दिया गया।

रवीन्द्र कौशिक ने अपने जीवन के अगले 16 वर्ष मिनवाली और सियालकोट की जेलों मे बिताए जहां उन्हे टीबी की घातक बीमारी हो गयी। अंतत: मूलतान की जेल मे उनकी हृदय रोग से मृत्यु हो गयी और भारत का श्रेष्ठतम जासूस आज भी उस जेल के पीछे दफ्न है।

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