एके मिश्रा : अदभुत कहानी उस व्यक्ति की जो हजारीबाग के गाँव से निकलकर आज तैयार कर रहा है देश के नौकरशाह

भारत की भूमि मानव जाति के कुछ बेहतरीन गुरुओं की गवाह रही है। अर्जुन और द्रोणाचार्य की गाथाओं से चंद्रगुप्त और  चाणक्य के अभियानों तक। एक शिष्य वह है जो अपने सपनों का पीछा करता है। जबकि एक गुरु वह है जो दूसरों को अपने सपनों का पीछा करने में मदद करता है। प्राचीन दिनों की तरह, आधुनिक भारत भी महान गुरुओं से रिक्त नहीं है। ऐसे ही एक महान गुरु ‘सक्सेस गुरु एके मिश्रा’ जी हैं।

अपनी यात्रा एक ऐसे क्षेत्र से शुरू करते हुए, जहां ‘ग्रामीण’ शब्द भी कम लगता है, एके मिश्रा आज भारत के नौकरशाहों के गुरु बन गए हैं। आईएएस, आईपीएस, आईएफएस या अन्य किसी भी सिविल सेवाओं के उम्मीदवार, एके मिश्रा जी के मार्गदर्शन की चाह रखते हैं। मिश्रा जी का जन्म झारखंड के छोटा नागपुर पठार में स्थित हजारीबाग जिले के एक छोटे से गांव में हुआ। आज गांव को अन्य बड़े शहरों से जोड़ते सड़क सेवा उपलब्ध है, लेकिन एके मिश्रा के बचपन के दिनों में हालात इतने अनुकूल नहीं थे। उन्हें अपने स्कूल तक पहुंचने के लिए प्रत्येक दिन 5 किलोमीटर कि पैदल यात्रा करनी पड़ती थी। स्कूल प्रिंसिपल के पुत्र होने कि वजह से मिश्रा जी बचपन से ही एक अच्छे छात्र थे। हजारीबाग के जीवन में दैनिक कठिनाइयों ने उन्हें जीवन के आवश्यक सबक सिखाए, जो कि बाद में उनकी सबसे बड़ी शक्ति बनी। छोटा नागपुर पठार के ग्रामीण और अलग थलक इलाकों में मिश्रा जी ने अंगिनत लोगों को देखा होगा जिन्हें प्रभावी प्रशासन की आवश्यकता थी। जीवन की छोटी घटनाएं, दैनिक कठिनाईयों ने मिश्रा जी को वह सबक सिखाये जो शायद कोई विश्वविद्यालय भी नहीं सिखा सकता था।

मिश्रा जी ने स्थानीय गांव के स्कूल से प्रारम्भिक, हजारीबाग के एक कालेज से कालेज कि, और दिल्ली विश्विद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। उनके पास खुद एक प्रशासक बनने के लिए आवश्यक सभी योग्यताएं थी, लेकिन उनके सपने कुछ अलग थे। उन्होंने ‘मानव सॉफ्टवेयर’ को विकासित करने का निर्णय लिया, जिसे वह देश के प्रभावी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मानते हैं। “किसी भी स्वस्थ मस्तिष्क वाले व्यक्ति को उत्कृष्टता के लिए प्रशिक्षित किया जा सकता है। मैं यह मानने से इनकार करते हैं कि कोई कर सकता है और दूसरा नहीं। पहले किसी व्यक्ति की विशेष प्रतिभा की पहचान करना चाहिए और फिर उसे मनोवांछित लक्ष्य के के लिए विकसित किया जा सकता है, “एके मिश्रा जी कहते हैं। कुछ वर्षों पूर्व ये माना जाता था कि सिविल सेवा केवल बड़े शहरों के छात्रों के लिए ही है , परंतु एके मिश्रा ने अपनी मेहनत और नेक सोच से इस मिथ्या का खंडन किया । एके मिश्रा ने विभिन्न जीवन परिवर्तनकारी प्रशिक्षणो के माध्यम से अपनी परियोजना शुरू की,  हालांकि उनका पहला ठोस कदम १९९३ में चाणक्य आईएएस अकादमी की स्थापना थी। तब से एके मिश्रा ने कभी भी जीवन में पीछे मुड़कर नहीं देखा। स्थापना से केवल २५ वर्षों की अवधि में ही, ४००० से अधिक सिलेक्शनो के साथ चाणक्य आईएएस अकादमी सिविल सेवा उम्मीदवारों के लिए आज मुख्य गंतव्य बन गई हैं।

हालांकि, एके मिश्रा जी का ‘मानव सॉफ्टवेयर’ विकसित करने का महान उद्देश्य केवल अकादमी तक सीमित नहीं है। कुछ साल पहले, उन्होंने अपने सपनों की परियोजना ‘AK Mishra art of success’ के नाम से स्थापित किया। मिश्रा जी का मानना ​​है कि प्रोत्साहन से अधिक सफलता के लिए जीवन में प्रेरणा की आवश्यकता है। कुछ ही सालों के भीतर इस परियोजना ने सफलता की हर ऊंचाई को छुं लिया है। एके मिश्रा विश्व भर में अपने जीवन परिवर्तनकारी सेमिनारों का आयोजन करते हैं। वे अपनी ‘Art of success’ परियोजना के तहत जीवन के विभिन्न क्षेत्रों के लिए समर्पित प्रशिक्षण भी प्रदान करते हैं, जैसे Art of Success for Parenting, Art of Success for Successful, Art of Success for Professionals, Art of Success for Aspirers, Art of Success for Teenagers, Art of Success for Human Relationships, इत्यादि ।

हाल ही में इन्होंने एन के चड्ढा तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के कई विख्यात मनोवैज्ञानिकों के साथ मिल कर, ‘Art and Science of Parenting’ नामक पुस्तक भी लिखी है। नैदानिक ​​मनोवैज्ञानिकों, न्यूरो भाषाई प्रोग्रामिंग प्रशिक्षकों से युक्त एक विशेष टीम, एके मिश्रा जी के परियोजनाओं के साथ जुड़ी हैं। एके मिश्रा ने देश भर में विभिन्न सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों में आपने सेमिनारों को आयोजित किया है और आगे भी करते रहेंगे। दिल्ली, गुड़गांव, अहमदाबाद, जयपुर, पटना, रांची, हजारीबाग, जम्मू-काश्मीर, गुवाहाटी, लखनऊ, पुणे, मुंबई, अलीगढ़, लंदन, ऑस्ट्रेलिया, ये उन अनगिनत शहरों में से कुछ है जहां मिश्रा जी के सेमिनारों का आयोजन हो चुका है

चाणक्य आइएएस अकादमी और AK Mishra art of success, के अलावा उनकी एक और अति महत्वपूर्ण परियोजना है ‘AK Mishra Foundation, जिसके माध्यम से वे समाज के वंचित तबके का सहायता करते हैं। कुछ दिन पहले ही इस संस्था ने दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके के खदर बस्ती में वंचित तबके के बाल्को के लिए मेडिकल कैम्प का आयोजन किया था। यह संस्था रामगढ़ और हजारीबाग के इलाकों में विशेष रूप से काम कर रही है, जहां कइ बार मेडिकल कैम्प और स्वरोजगार के प्रति जागरूकता के प्रशिक्षणो का आयोजन भी किया गया है। यह संस्था ‘Olympic association’ के साथ मिलकर खेलों को भी बढ़ावा देती है।

जहां अधिकतर लोग ये सोचने में व्यस्त रहते हैं की उन्हें समाज से क्या प्राप्त हुआ , एके मिश्रा समाज को कुछ देने में विश्वास रखते हैं। अपनी उल्लेखनीय योग्यताओं के साथ, मिश्रा जी आसानी से एक आरामदायक जीवनशैली चुन सकते थे। लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत का विकल्प चुना झारखंड के एक दूरस्थ गांव से भारत के उभरते नौकरशाहों के गुरु बनने के तक, एके मिश्रा की जीवन यात्रा वास्तव में देश के युवाओं के लिए आपने आप में एक प्रेरणास्रोत है।

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