क्या गेहलोत खेमे के ही किसी बड़े नेता ने कर दी है कॉंग्रेस की रणनीति बीजेपी से साझा?

राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट के विरुद्ध टोंक सीट से भाजपा ने अब वरिष्ठ नेता यूनुस खान को उम्मीदवार के रूप में उतार दिया है। भाजपा का यह फैसला कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है क्योंकि टोंक मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। राजनैतिक विशेषज्ञों कि माने तो टोंक से मुस्लिम उम्मीदवार उतार कर भाजपा ने एक जबरदस्त दावं खेल दिया है और इससे सचिन पायलट को मुश्किलें आ सकती है।

कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस के ही अंदर से किसी ने पायलट की रणनीति भाजपा को लीक कर दी थी। माना जा रहा है, कांग्रेस के रणनीति को समक्ष कर ही भाजपा ने अपना उम्मीदवार बदला।यह बात किसी से छुपी नहीं है कि राजस्थान कांग्रेस, कई खेमों में बंटी हुई है, और सारे बड़े नेताओं के बीच मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनने की होड़ मची है। ऐसे में टोंक से सचिन पायलट की रणनीति लीक होने के संदर्भ में संदेह की तीर सीधे-सीधे गहलोत खेमे की और जा रही है।

कई लोगों का मानना है कि सचिन पायलट की मुख्यमंत्री पद पर उम्मीदवारी खत्म करने के लिए ही, गहलोत खेमे ने टोंक विधानसभा क्षेत्र से पार्टी की रणनीति लीक कर दी है। अशोक गहलोत और उनके खेमे की ओर उठते ईन आरोपों को अगर ऐतिहासिक परिपेक्ष्य में देखा जाये, तो यह असम्भव तो कतई प्रतीत नहीं होते।

अशोक गहलोत, राजनीति के पुराने और मंझे हूए खिलाड़ी हैं, साम दाम दण्ड भेद, से भलीभांति परिचित हैं। अपने राजनैतिक प्रतिद्वंद्वियों को कूटनीति से चीत करने की कला में पारंगत हैं गहलोत। 1998 के चुनावों में राजस्थान में सबसे ज्यादा वोटबैंक वाली जाट कौम को छकाकर मुख्यमंत्री की कुर्सी भी हासिल करने में कामयाब रहे थे,कूटनीतिक रुप से माहिर गहलोत।

2008 में विधानसभा भी अपने प्रतिद्वंद्वी सीपी जोशी को अपनी कूटनीति से किनारे कर दुसरी बार मुख्यमंत्री बनने में कामयाब रहे थे गहलोत। सूत्रों के हवाले से खबर है कि इस बार गहलोत के प्रतिद्वंद्वी के रुप में पायलट है, और गहलोत खेमा सीपी जोशी कि तर्ज पर उनको को चुनाव हरा सकता है।

यह बात तो स्पष्ट है कि कांग्रेस के अंदर घोर घमासान मचा हुआ है। अब इनमें से को विजय श्री प्राप्त करता है और कौन होता है पराजित, यह बात चुनावों के नतीजे सामने आने के बाद ही पता चलेगा।

Disclaimer: The views and opinions expressed in this article are those of the authors and do not necessarily reflect the official policy or position of SatyaVijayi.

Comments

comments