जोधपुर: चुनाव से पहले जिले के सारे सरपंच और जनप्रतिनिधियों से निजी रूप से कॉल कर बेटे के लिए वोटों की तलाश में गहलोत

स्वतंत्रता के बाद से अगर राजस्थान की राजनीति की बात करे तो कुछ गिने चुने कद्दावर नेताओ मे अशोक गहलोत का नाम शुमार होता है। एकाधिक बार सुबे के मुख्यमंत्री रहे गहलोत को राजस्थान में बच्चे से बुढ़े सभी जानते हैं। पर अगर लोगों की माने तो पहली बार प्रदेश की राजनीति में अशोक गहलोत बहोत लाचार और बेबस से नजर आ रहे हैं।

दरअसल, अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत इस बार जोधपुर से चुनाव लड़ रहे हैं। पर अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा के गजेंद्र सिंह शेखावत के सामने शुरू से ही वैभव कमजोर नजर आ रहे थे। हालांकि अशोक गहलोत ने अपने तरफ से कोई कसर बाकी नहीं रखी। प्रदेश के मुख्यमंत्री होते हुए भी किसी सामान्य कार्यकर्ता की तरह गहलोत गली गली, मुहल्ले मुहल्ले हाथ जोड़कर बेटे के लिए घूमे।

एक के बाद एक धड़ाधड़ जन सभाए भी किये। लेकिन इन सबके बावजूद भी अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत जोधपुर से पिछे ही नजर आ रहे हैं। यह चुनाव अशोक गहलोत के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बना हुआ है। इसी जोधपुर से वह खुद पांच बार सांसद रहे हैं। अब अगर उनके ही बेटे यहां से पराजित होते हैं तो इससी बड़ी फजीहत शायद और कुछ नहीं हो सकती।

जोधपुर चुनाव में बस दो दिन बचे हैं और ऐसे में सूत्रों के मुताबिक अशोक गहलोत अपने हर पहचान वाले को फोन लगा रहे हैं। जोधपुर जिले के सभी सरपंच और जनप्रतिनिधियो को काॅल कर कर के अंतिम समय में कुछ करिश्मा करने के प्रयास में लगे हैं मुख्यमंत्री। सूबे के लोगों का कहना है गहलोत को इतना लाचार कभी नहीं देखा।

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