बेटे की हार के डर से अशोक गहलोत ने बदला राष्ट्रपति कोविंद पर अपना बयान?

बेटे के हारने के डर से अशोक गहलोत ने बदला अपना बयान? कहा करते हैं राष्ट्रपति कोविंद का सम्मान

हाल ही में राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि गुजरात विधानसभा से पहले चुनावी समीकरणों को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने रामनाथ कोविंद को राष्ट्रपति बनवाया क्योंकि वो एक विशेष जातीय समुदाय के थे। अशोक गहलोत ने कहा “लोग कहते हैं कि राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, मैंने एक लेख में पढ़ा … उन्हें चिंता हुई कि वे गुजरात में सरकार नहीं बना पाएंगे … तब अमित शाह ने अपना हथियार चुना कि कोविंद जी को राष्ट्रपति बनाए रखने के लिए जातीय गणित सही है … और आडवाणी जी दौड़ से बाहर हो गए … राष्ट्र को उम्मीद थी कि आडवाणी को वह मिलेगा जो वह चाहते थे.”

लेकिन बाद में शायद अशोक गहलोत को यह डर सताने लगी कि कहीं उनके इस बयान से उनके बेटे वैभव गहलोत जो की जोधपुर से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं उन्हे कोई मुसीबत न हो जाए। और इसीलिए शायद अब अशोक गहलोत ने अपने बयान से पल्टी मारते हुए कहा है कि वह राष्ट्रपति कोविंद का बहोत सम्मान करते हैं।

बाद में अशोक गहलोत ने ट्वीट करके कहा, “बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान मेरे बयान को कुछ मीडिया वालों ने गलत ढंग से पेश किया. भारतीय राष्ट्रपति का मैं बेहद सम्मान करता हूं और श्री रामनाथ जी का निजी तौर से भी, जिनसे मैं मिल चुका हूं और उनकी सादगी और विनम्रता से बहुत प्रभावित हूं.”

बीजेपी ने जवाब देने में देरी नहीं की… बीजेपी प्रवक्ता जीवीएल नरसिम्हा ने कड़े शब्दों में गहलोत की आलोचना की और मांग की कि चुनाव आयोग गहलोत के खिलाफ कार्रवाई करे. जीवीएल नरसिम्हा ने कहा, “राजस्थान के सीएम का बयान दलित विरोधी है. हम लोग मांग करते हैं कि गहलोत जी माफी मांगें. गहलोत ने कहा है कि कोविंद प्रेसिडेंट बने क्योंकि वे दलित समुदाय से आते हैं. हम मांग करते हैं कि चुनाव आयोग गहलोत को नोटिस जारी करे.”

वैसे लोक सभा चुनाव अभियान के बीच उठा ये विवाद जल्दी ख़त्म होगा इसके आसार फिलहाल दिखाई नहीं देते.

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