पिछले 40 साल के राजनीतिक जीवन में गहलोत को इतना मजबूर कभी नहीं देखा गया

चुनावी डेस्क- राजस्थान की राजनीति में जादूगर कहे जाने वाले गहलोत इन दिनों मजबूर ओर परेशान नजर आ रहे है।

इतिहास गवाह है, पुत्र मोह में बडे बडे क्षत्रप धराशायी हो गये है। लिहाजा बेटे वैभव की जीत कि नाव पार लगाने के लिए गहलोत तमाम दांव आजमा रहे है।

गहलोत जोधपुर कि गली-गली जा रहे है। बाकी 24 सीटों को मानों भूल गये हो, 150 सभाओं में से 93 अकेले जोधपुर में कर चूके है।

गहलोत को हार का डर इतना सता रहा है, जोधपुर कांग्रेस के एक बडे नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि ” हताश गहलोत अब बेटे को जिताने के लिए तथाकथित वोटों के ठेकेदारों से खुद फोन करके प्रलोभन देकर वोटों का जुगाड़ कर रहे है।”

लिहाजा गहलोत ने जोधपुर सीट को अपने सियासी कद ओर अस्तित्व से जोड़ लिया है। इसके चलते गहलोत अपना हर सियासी दांव आजमा रहे है।

इस बार का जोधपुर लोकसभा का चुनाव ऐतिहासिक होने वाला है। क्योंकि टक्कर कांटे कि है, ओर ऐसे में नतीजे दिलचस्प होगें।

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