भाजपा के सफल दक्षिण अभियान के सेनानायक मुरलीधर राव

भारतीय जनता पार्टी के आलोचक इसे अक्सर ही एक उत्तर भारत केन्द्रीत दल कहते हैं। उनका कहना है कि भाजपा उत्तर भारत में केन्द्रीत है और इसी कारण इसे सही मायनों में एक राष्ट्रीय दल नहीं कहा जा सकता। हालाँकि तथ्यों के आधार पर यह कहना तो बिल्कुल गलत होगा कि भाजपा एक उत्तर भारतीय दल है, क्योंकि हमेशा से ही इस पार्टी की पश्चिमी और पूर्वी भारत में भी अच्छी उपस्थिति रही है।

अब तो उत्तरपूर्व के भी कई राज्यो में भाजपा की सरकारे चल रही है। पर इस सत्य को भी अस्वीकार नहीं किया जा सकता है कि दक्षिण भारत में कर्नाटक के अलावा भाजपा कभी कहीं विशेष सफलता प्राप्त नहीं कर पाई है। पार्टी की इसी एक कमी को मिटाने के लिए दल के कई वरिष्ठ नेता लगे हुए हैं और उन्ही मे से एक महत्वपूर्ण नाम है श्री मुरलीधर राव जी का।

संघ की शाखाओं से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले मुरलीधर राव, आरंभ से ही एक कुशल संयोजक के रुप में जाने जाते रहे हैं। अपने छात्र जीवन में मुरलीधर राव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के साथ जुड़े जहां उन्हे विशेष ख्याति प्राप्त हुई। अपने प्रखर राष्ट्रवादी विचारों के लिए विख्यात मुरलीधर राव पर इसी दौरान जानलेवा हमला भी हुआ।

विद्यार्थी परिषद् के अपने दिनों में मुरलीधर राव ने जम्मू कश्मीर के आतंक ग्रसित क्षेत्रों में भी विशेष कार्य किये। इसके बाद मुरलीधर राव का आगमन संघ के ही एक और संगठन, स्वदेशी जागरन मंच में हुआ।

स्वदेशी जागरण मंच के अपने दिनों में मुरलीधर राव को दत्तोपंत थेंगड़ी जैसे राष्ट्रवादी अर्थशास्त्रीयो के साथ काम करने का अवसर प्राप्त हुआ जिनका लक्ष्य था भारत की ग्रामीण अर्थनीति को वैश्विकरण से बचाना। इसी प्रकार संघ के विभिन्न संगठनो से अनुभव प्राप्त करते हुए मुरलीधर राव जी 2009 मे आ पहुंचे भाजपा मे। अपने कुशल नेतृत्व और मेहनती चरित्र के बल पर वह जल्द ही पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद तक जा पहुंचे।

अब यह दायित्व मुरलीधर राव जी के अनुभवी कंधो पर था कि वह पार्टी का विस्तार दक्षिणी भारत में करें । और उन्होने अपने इस दायित्व के निर्वहन करने मे कोई कसर नहीं छोड़ी। तेलंगाना मे हल्दी किसानो के आंदोलन का नेतृत्व करना हो या किसान पंचायतो का निर्माण या फिर गोदावरी आरती शुरू करवाना, मुरलीधर राव जी ने कई सामाजिक कार्यों में योगदान देकर प्रदेश में भाजपा के लिए एक पक्की जमीन तैयार करने का काम किया। इसी के साथ पार्टी के संगठन को मजबूत करने में भी उनका अहम योगदान रहा। नगर नगर, गांव गांव, इलाके इलाके और बूथ बूथ तक स्वयं जाकर संगठन को मजबूत बनाने के कार्य मे किया। खुद जा जा कर हर छोटे से छोटे कार्यकर्ता के साथ बैठ कर रणनीति बनाई।

अपने इस अथक परिश्रम का फल मुरलीधर राव जी को लोकसभा के चुनावो मे मिला जब भाजपा को तेलंगाना की कुल 17 सीटों मे से 4 सीटें मिली । यह 2014 के लोकसभा चुनावों से दोगुना था। भाजपा को इस वर्ष तेलंगाना मे वोट भी 19.5% मिले जो की 2014 की तुलना में दो गुने से भी अधिक है। तेलंगाना के अलावा एक और दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक में इस वर्ष के लोकसभा चुनावों में भाजपा की अभूतपूर्व प्रदर्शन रही। पार्टी ने कर्नाटक के 28 मे से 25 सीटों पर कब्जा किया, जबकि बाकी मुख्य पार्टीयो को केवल एक-एक सीट से ही संतोष करना पड़ा।

इन आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि मुरलीधर राव जी के नेतृत्व में भाजपा दक्षिण भारत में समय के साथ अपना प्रभाव विस्तार कर रही है और क्या पता शायद एक दशक में कर्नाटक के आलाव भी कुछ राज्यो मे सरकार तक बना ले। जो भी हो पर यह कहना तो गलत नहीं होगा कि मुरलीधर राव जैसे नेताओ के नेतृत्व में दक्षिणी भारत में भाजपा का भविष्य उज्जवल प्रतीत होता है।

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