२६ जनवरी का शहीद ‘चन्दन’

जिस समय सारा देश भारत माता के जयगान और वन्दे मातरम के उद्घोषों से गूँज रहा था, उसी समय देश की राजधानी दिल्ली से मात्र 220 किमी दूर स्थित उत्तर प्रदेश के कासगंज शहर में चन्दन गुप्ता नाम का युवक जिसने अपने जीवन में अभी कुछ 19 बसन्त ही देख पाए होंगे, भारत माता की जय और वन्दे मातरम कहने का मूल्य अपने लहू से चुका रहा था |

उबलते हुए तरुण रक्त को यदि देशप्रेम का ज़ुनून चढ़ा हो तो यह उस देश के लोगों के लिए अत्यन्त गौरव की बात होती है | विशेष रूप से आज के इस व्हाट्सऍप और फेसबुक वाले युग में यदि कुछ युवक बिना कोई नशे की सामग्री लिए, घने कोहरे को लपेटे सर्द मौसम में हाथों में तिरंगा लेकर 26 जनवरी के दिन, जब अधिकांश लोग रजाई में अवकाश का आनंद उठा रहे होते हैं, बाइकों से संचलन कर रहे हों तो निश्चित ही उन युवकों का उत्साहबर्धन करना, उनका मनोबल बढ़ाना सम्पूर्ण नगर का दायित्व बन जाता है | और यदि ऐसे में कोई अप्रिय घटना घटती है, जिसमें उन होनहार युवकों में से अनेकों को (लगभग 20 -25 लोगों को ) गंभीर चोटें आती हैं और साथ ही एक निहत्थे निर्दोष युवक को अपने जीवन तक से हाथ धोने पड़ जाते हैं तो निश्चित रूप से यह स्थानीय पुलिस प्रशासन की बहुत बड़ी खामी को उजागर करती है |

कुछ लोगों का सोचना है कि लगभग 90 % मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र मोहल्ला वड्डू नगर से यह रैली निकाले जाने के प्रयास के कारण यह घटना हुई | मेरा उन सभी से एक साधारण सा प्रश्न है कि क्या वड्डू नगर जैसे मुस्लिमबाहुल्य इलाकों से गुजरने मात्र के लिए भी किसी वीजा की आवश्यकता पड़ने लगी है ? यह कोई सम्प्रदाय विशेष की यात्रा नहीं थी, न कोई राम नवमी की उत्सवयात्रा थी, न ही कोई विजयादशमी का संचलन था; यह यात्रा थी भारत माँ के गौरवगान की यात्रा, यह यात्रा थी तिरंगे की शान की यात्रा | इस यात्रा के लिए तो क्या हिन्दू और क्या मुसलमान ? इस यात्रा के निकाले जाने पर यदि कुछ मुसलमानों को आपत्ति थी तो सच्चे भारतीय मुसलमानों का फ़र्ज़ बनता था कि उन कुछ अपराधियों को पुलिस के सुपुर्द कर इस तिरंगा यात्रा में सम्मिलित हो कर देश का गौरव बढ़ाते | किन्तु इस सब के विपरीत, जिन छतों से पुष्प वर्षा होनी चाहिए थी, वहाँ से पत्त्थर बरस रहे थे | प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है, उन्हें उस स्थिति में कारगिल युद्ध की सुनी हुई घटनाओं का स्मरण हो रहा था कि किस प्रकार ऊंचाई से फेंका हुआ एक-एक पत्थर बन्दूक से निकली गोली के समान हानि पहुँचा सकता है | तिरंगा यात्रा के युवकों पर न सिर्फ पत्त्थर फेंके गए, अपितु तेजाब भी फेंका गया और यहाँ तक कि निहत्थे बाइक सवारों को गोलियों से न सिर्फ खदेड़ा गया, अपितु चंदन गुप्ता नामक युवक की नृशंस हत्या तक कर डाली गयी |

चन्दन गुप्ता बी कॉम तृतीय वर्ष का छात्र था जो कुछ NGO संस्थानों के लिए रक्तदान शिविरों के आयोजनों में न सिर्फ बढ़-चढ़ कर भाग लिया करता था, अपितु स्वयं भी उसने अनेक बार रक्तदान किया था | उसके दिए रक्त ने न जाने कितने हिन्दुओं और न जाने कितने मुसलमानों के प्राण बचाये होंगे, किन्तु आज उस पुण्य के फलस्वरुप उसे विषाक्त रक्तपिपासु गोली को अपने सीने में झेलना पड़ा | बात यहीं समाप्त नहीं होती, इस कुरुक्षेत्र का यह अभिमन्यु घायल अवस्था में ही घटना स्थल के समीप करीब 200 मी की दूरी पर स्थित पुलिस थाना बिलराम गेट तक चल कर जाकर अपने गोली मारे जाने की पुष्टि करते हुए शहर पर आने वाली मुसीबत की सूचना देता है, किन्तु अपनी बात समाप्त करने के पश्चात् ऐसी मूर्छा में चला जाता है, जहाँ से कभी कोई लौट कर नहीं आता |

इस प्रकार 26 जनवरी के दिन जब सभी स्थानों पर देशप्रेम और देशभक्ति का सन्देश प्रसारित किया जाता है, वन्दे मातरम और भारत माता के जयघोषों से सारा राष्ट्र गुंजाया जाता है, भारत माँ का एक सपूत हाथों में लिए हुए तिरंगे को अपना कफ़न बनाकर हम सभी के लिए अनेक अनुत्तरित प्रश्न छोड़ जाता है |

चन्दन का यह दुःखद अन्त प्रश्नचिह्न लगाता है उन माताओं की शिक्षा पर जो अपने लालों को भगत सिंह और शिवाजी की कथाएँ सुनाकर बड़ा करती हैं | यह बलिदान प्रश्नचिह्न लगाता है उन पिताओं के संस्कारों पर जो स्वयं से पहले राष्ट्र को पूजने की प्रेरणा देते हैं | यह हत्या प्रश्नचिह्न लगाती है उस सौहार्द्रपूर्ण वातावरण की परिकल्पना पर जिसका स्वप्न हमारी सम्पूर्ण व्यवस्था दिखाती है |
यहाँ विचारणीय बात यह है कि गणतन्त्र दिवस के अवसर पर चन्दन का बलिदान कहीं सीमा क्षेत्र पर नहीं, अपितु अपने ही शहर के दूसरे किसी मोहल्ले में अपने ही देशवासियों के हाथों बिना किसी अपराध के हुआ |
कासगंज नगर जिसमें मुस्लिमों की आबादी वहाँ की कुल आबादी का लगभग 25% है, वहाँ यदि गणतन्त्र दिवस के दिन वन्दे मातरम के प्रति असहिष्ष्णुता की इतनी पराकाष्ठा हो जाये तो निश्चित ही ऐसे में गैर मुस्लिमों और राष्ट्र हितैषियों के लिए यह चिंताजनक बात है |

जब कश्मीर से अपने ही देश में विस्थापित लाखों हिन्दुओं का पलायन होता था, जब केरल में चल रहे लवजिहाद की बात उठती थी, और जब केरल में ही आरएसएस के स्वयं सेवकों की क्रूरतापूर्वक हत्याओं के समाचार मिला करते थे, तब तक भी ये सब घटनाएं दूर की सी प्रतीत होती थीं; किन्तु अब तो देश की राजधानी के निकटवर्ती स्थानों पर इस प्रकार के परिदृश्यों ने स्थान लेना प्रारम्भ कर दिया है जो कि भारत जैसे राष्ट्र की अक्षुण्णता और अखण्डता के लिए कदापि उचित नहीं |

समस्या को स्वीकार न करना ही विकराल समस्या के जन्म का कारण बनता है |

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार और देश की मोदी सरकार से अपेक्षा है कि वह गणतन्त्र दिवस के सम्मान की रक्षा करते हुए अपने प्राणों तक की आहुति दे देने वाले चन्दन के इस बलिदान को उचित सम्मान देने के साथ-साथ उसके हत्यारों को शीघ्र अति शीघ्र उचित दण्ड दिलवाकर भारत के अनेक देश भक्तों और उनकी माताओं का मान रखेंगे |

यदि आज़ाद भारत में भी बहुसँख्यक समाज को भारत माता की जय और वन्दे मातरम कहने के कारण सीने पर गोली खानी पड़ जाये तो बेमानी है ऐसी आज़ादी और बेमानी हैं उसके मायने |

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