क्या कांग्रेस पार्टी के लिए सोनिया गांधी है भारत माता से भी बड़ी?

कितनी विचित्र बात है कि भारत माता की जय एक राजनीतिक विषय बना हुआ है। अधिकांश देशों में नेशन फर्स्ट यह भाव तो देखने को मिलता है किंतु विश्व में भारत की प्रसिद्धि इसलिए भी है कि यहां नेशन फर्स्ट के साथ वैल्यू मस्ट भी कहा जाता है। भारतीय जनमानस में गहरे तक समाये संस्कार इस देश को अक्षुण बनाते हैं। यूनान मिस्र रोमा सब मिट गए जहां से कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी .. आखिर वर्षों से यह बात इसीलिए कही जा रही है कि यहां शक, हूण, कुषाण, मुगल, अंग्रेज और पता नहीं कितने लोग आए, इस देश को लूटा.. अनेक अत्याचार भी किए किंतु फिर भी इस राष्ट्र को इसकी परंपराओं को इसके रीति-रिवाजों को और सिद्धांतों को समाप्त नहीं कर पाए। भारत की मिट्टी में जो संस्कार रचे बसे हैं उनके कारण ही यह देश विश्व में अपना विशिष्ट स्थान रखता है। महाराजा शिवि, राजा रघु, दिलीप, रंतिदेव और हरिश्चंद्र की परंपराओं वाला यह देश.. जहां स्वयं ईश्वर ने इस मिट्टी में बाल क्रीड़ा की है। घुटुरुन चलत रेणु तनु मंडित मुख दधि लेप कियो.. इस प्रकार का सजीव भाव जहां के कवि अपनी रचनाओं में चित्रित करते रहे हो, जिस देश में जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी जैसी उदात्त भावना हो, जहां पक्षियों तक की सुरक्षा के लिए व्यक्ति स्वयं के शरीर की बोटी बोटी कटवाने को तैयार रहता हो, जहां पेड़ पौधों की सुरक्षा के लिए सैकड़ों महिलाएं अपने प्राण न्योछावर करने को तत्पर हों, जहां अपने सतीत्व की रक्षा के लिए हजारों नारियां अग्नि में जौहर करने को सौभाग्य मानती हों … ऐसी महान परंपराओं वाला यह देश यदि भारत माता की जय बोली जाए या नहीं इन विषयों को राजनीतिक विषय बनाता है तो यह वास्तव में बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। भारत माता की जय यह विषय देश भक्ति का विषय है, यह विषय हर एक भारतीय की आन-बान और स्वाभिमान का विषय है। यह भगत सिंह सुखदेव राजगुरु सुभाष चंद्र बोस चंद्रशेखर आजाद सहित हजारों क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का विषय है।

यह अपि स्वर्णमयी लंका न मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी जैसे उदात्त भाव रखने वाले मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को प्रणाम करने का विषय है। भारत माता की जय यह विषय है स्वतंत्रता के लिए है जंगल जंगल संघर्ष करने वाले महाराणा प्रताप की जिजीविषा का। यह विषय है छत्रपति शिवाजी महाराज के अद्भुत कौशल और राष्ट्र के प्रति समर्पण का। यदि ऐसा बड़ा विषय राजनीति की संकुचित धारा के कारण छोटा बनाने का प्रयास किया जाता है तो उसे यह राष्ट्र कभी स्वीकार नहीं करेगा। इस देश में भारत माता को डायन कहने वाले खलनायक आज भी सियासी रोटियां सेक रहे हैं। इस देश में भारत माता की जय के नारे को रुकवा कर किसी एक राजनीतिक दल के प्रमुख लोगों की जय जयकार करवाने का कुत्सित प्रयास होता है तो उसे यह राष्ट्र कभी स्वीकार नहीं करेगा।

क्या इस राष्ट्र के नागरिकों का राष्ट्रीय चरित्र इतना कमजोर हो गया है कि वे छोटे-छोटे राजनीतिज्ञों के जय जयकार की एवज में भारत माता का अपमान स्वीकार कर लेंगे? क्या इस राष्ट्र के नागरिकों का राष्ट्रीय चरित्र इतना कमजोर हो गया है कि वह छोटे-छोटे राजनीतिज्ञों के जय-जयकार के वश में भारत माता का अपमान स्वीकार कर लेंगे? ऐसे अवसर पर हमें याद करना चाहिए स्वामी विवेकानंद जैसे तेजस्वी युवा को.. हमें याद करना चाहिए क्रांतिकारी संत स्वामी दयानंद सरस्वती को ..हमें याद करना चाहिए राजा राम मोहन राय को.. हमें याद करना चाहिए राणा सांगा को ..किस प्रकार के एक से एक बड़े चरित्र इस देश में हुए हैं। ऐसी परिस्थितियों में मुझे लगता है कि सांपों को दूध पिलाने से काम नहीं चलेगा। जब जब राष्ट्र के मान बिंदुओं पर आघात करने का कुत्सित प्रयास होता है तब जिम्मेदार लोगों को एक आदर्श स्थापित करना होता है और ऐसे समय पर आवश्यकता होती है हिम्मत की खुद्दारी की। ऐसे सर्प जो राष्ट्र की अस्मिता के साथ खेलने का खिलवाड़ करते हैं उनके फन पर एडी रगड़ने में देर नहीं करनी चाहिए। हर एक व्यक्ति के पास अपने विचार होते हैं, अपने विचारों के माध्यम से सामाजिक क्षेत्रों में चर्चा के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा विमर्श खड़ा करके इस प्रकार का माहौल बनाया जा सकता है कि जो लोग इस देश के साथ ..इसकी अस्मिता के साथ.. इसके मान सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का प्रयास करते हैं उनको यथोचित दंड दिया जाना भी आवश्यक है।

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