कया जोधपुर को निजी सम्पत्ति समझता है गहलोत परिवार?

देश के हर कोने में विकास पर वंशवाद भारी है। गांधीपरिवार, ठाकरे, मुलायम, लालू, पासवान, से लेकर अब राजस्थान में उभरता गहलोत परिवार वंशवाद का दंश बन रहा है।

हालांकि अब हालात बदलते हुए नजर आ रहे है. ऐसे में नवोदित वंशवाद कि “वैभव” कोपल अंकुरित होने से पहले जमीदोज हो सकती है।

राजनीतिक जानकारों का कहना कि बीते एक दशक में देश में वोटरों का मानस बदला है। ओर ऐसे में वोटर वंशवाद, अपराधी, ऐसे तत्वों को चुनने के बजाए विकास को चुनते है।

साथ ही उनका तर्क है कि राहुल गांधी का अमेठी से वायनाड पलायन भी वोटर कि बदलती नब्ज के कारण ही हुआ है। वही जोधपुर के वरिष्ठ पत्रकार राजपुरोहित का कहना है, वोटिंग का बदलता ट्रेड वैभव के सामने मुसीबत खड़ी कर सकता है।

गौरतलब है कि, जोधपुर से 23 मई के नतीजे चौकाने वाले हो सकते है।

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