विमान में विंडो सीट के लिए अतिरिक्त शुल्क पर सांसदों को आपत्ति,विरोध के बाद सरकार ने दी यह सफाई

संसद का मॉनसून सत्र शुरू हो चुका है। सत्र के पहले दिन बुधवार को राज्यसभा के सांसदों ने यह जानना चाहा कि विमानन कंपनियां विमानों के क्यों वसूलती हैं और उन्होंने प्रस्थान के ठीक पहले किराये में बढ़ोतरी पर एक सीमा तय करने की मांग की।

कांग्रेस सांसद छाया वर्मा ने कहा कि उन्होंने दिल्ली से रायपुर जाने के लिए 29 जून को इंडिगो की फ्लाइट ली, लेकिन बिजनेस क्लास के टिकट होने के बावजूद उन्हें आगे की सीट नहीं दी गई, जोकि खाली थी और कर्मचारी ने मनपसंद सीट के लिए उनसे 600 रुपये अतिरिक्त मांगा।

सभापति एम. वेंकैया नायडू ने इसे गंभीर मामला बताते हुए नागरिक उड्डययन मंत्रालय को मामले में संज्ञान लेने के लिए कहा।

द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) के तिरुचि शिवा ने विमान के प्रस्थान से ठीक पहले इसके किराए में वृद्धि पर एक सीमा तय करने की मांग की। शिवा ने कहा, “प्रस्थान के समय, किराये को 400 प्रतिशत तक बढ़ा दिया जाता है।

आप उन्हें मांग के हिसाब से किराये में बढ़ोतरी की इजाजत दे सकते हैं। लेकिन बेतरतीब ढंग से नहीं. इसकी एक सीमा होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि मनचाही सीट देने से यात्रियों के बीच भेदभाव की भावना उत्पन्न होती है। सीटों को पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर देना चाहिए। इन चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए, केंद्रीय नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि किराये को विनियमित किया गया था और सरकार तभी हस्तक्षेप कर सकती है, जब पारदर्शिता का उल्लंघन किया गया हो।

सिन्हा ने कहा, ‘विमान सेवा यात्रियों और विमानन कंपनी के बीच वाणिज्यिक निविदा के शर्तो पर मुहैया कराई जाती है। बीच की सीटों के लिए सबसे कम शुल्क लिए जाते हैं। लेकिन अगर आप विंडो सीट चाहते हैं, या ज्यादा आराम चाहते हैं, तो आपको ज्याद शुल्क चुकाना होगा।’

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अगर तीन माह पहले ही टिकट बुक कराए जाए तो, यहां विमान का किराया दुनिया में सबसे कम विमान किरायों में से है।

एयर इंडिया के बारे में भी ऐसी ही शिकायत पर सिन्हा ने कहा कि यह ‘वैश्विक वाणिज्यिक प्रक्रिया’ है और एयर इंडिया को भी अपने व्यावसायिक हितों को देखना होता है। सिन्हा ने कहा, ‘यह वाणिज्यिक प्रक्रिया है। यह पूरी दुनिया में होता है, अगर हमें एयर इंडिया को समुचित ढंग से चलाना है तो, हमें यह करना होगा।’

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