क्या वंशवाद ही राजस्थान में कांग्रेस का आखिरी हथियार है?

कल्पना करिये कि आप किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता है। आप अपने पार्टी के सभाओ मे दरी बिछाते हैं। हर जुलूस में शामिल होते हैं। चुनावो से पहले एक मौहल्ले से दूसरे मौहल्ले दोड़-दोड़कर प्रचार करते हैं। दूसरी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट करते हैं। पर जब टिकट वितरण की बारी आए तब आपके नाम पर चर्चा तक न हो और नेताजी के बेटे को प्रत्याशी बना दिया जाए। आप ठगा हुआ महसूस करेंगे। भारतीय राजनीति में इसी को वंशवाद कहते हैं। और यही वंशवाद कांग्रेस पार्टी की सबसे बड़ी हतीयार है इस साल के लोकसभा चुनावों में।

राजस्थान के राजनीति गलियारो की बाते सुनने से एक ही बात सुनाई देती है कि जोधपुर सबसे महत्वपूर्ण सीट है। और इस महत्वपूर्ण सीट से कांग्रेस ने वैभव गहलोत को मैदान में उतारा है। आप सब जानकर हैरान हो जाएगें कि इन वैभव गहलोत का राजनीति में कोई सक्रिय भूमिका नही रही है। इन्हे टिकट मिलने के खिलाफ सिर्फ एक ही कारण है और वह है इनका अशोक गहलोत का बेटा होना।

गहलोत परिवार कहीं न कहीं जोधपुर को अपना खानदानी सीट समझता है। इसी सीट से अशोक गहलोत खुद जोधपुर से पांच बार सांसद रह चुके हैं। और अब उनका मानना है कि इस सीट से उनके बेटे का सांसद बनना ही उचित है। परिवारवादी मानसिकता का इससे बड़ा भला क्या उधारण हो सकता है?

भाजपा की तरफ से केंद्रीय राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत दूसरी बार सांसद बनने के लिए मैदान में हैं। जोधपुर सीट पर मुख्यमंत्री गहलोत की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है।

यहां अब तक हुए चुनावों में आठ बार कांग्रेस और चार- चार बार भाजपा व निर्दलीय ने बाजी मारी। जबकि एक बार जनता पार्टी का प्रत्याशी विजयी रह चुका है। कांग्रेस की आठ जीत में गहलोत की अहम भूमिका रही है।

Comments

comments