Is RSS really equal to ISIS? A Brilliant Article by Nationalist Ravijot Singh…..

पिछले दिनों ‘पहली बार’ RSS के एक कार्यक्रम में जाना हुआ| यहाँ यह बताना ज़रूरी है की मैं आरएसएस के किसी कार्यक्रम में अपनी ज़िन्दगी में पहली बार गया| क्योंकि, जब से मैंने राष्ट्रवाद पर वीडियो बनाने शुरू किये है, बहुत सारे महानुभावों ने मुझे सीधा आरएसएस और भाजपा का ‘दलाल’ करार दिया है| अब अगर एक राष्ट्रवादी की सोच आरएसएस और भाजपा की सोच से मेल खाती है और बाकी दलों से नहीं, तो उसमे मेरी, आरएसएस या भाजपा की कोई गलती नहीं है|

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ख़ैर, तारीख थी अप्रैल 17, 2016 और मौक़ा था डाॅ. भीमराव अंबेडकर जी की जयंती को मनाते हुए ‘समरसता घोष संचलन’| यह आयोजित किया गया था करनैल सिंह स्टेडियम, नई दिल्ली में| दिन रविवार था और संयोग से मेरे पास समय भी था और मुझे इस कार्यक्रम में आमंत्रित करने वाले मित्र ने बताया था की आरएसएस का बैंड बजने वाला हैं इस कार्यक्रम में| मुझे पता है की इस लाइन को पढ़ कर बहुत सारे लोग जो आरएसएस को पसंद नहीं करते मुस्कुरा रहे होंगे| मैं उनको बता दूँ की की आरएसएस के कैडेट्स अपने Musical instruments यानि घोष का संचलन यानि Musical instruments March करने वाले थे|

तो मैं इस उम्मीद में वहाँ पहुँच गया की और कुछ नहीं तो एक संगीतमय शाम ही हो जाएगी| साथ में मैं यह भी देखना चाहता था की किस तरह से आरएसएस वाले देश में अराजकता का माहौल फैला रहें है|

जी हाँ, यही तो कहना है बहुत सारे कथित बुद्धिजीविओं का अपने देश के| ग़ुलाम नबी आज़ाद तो आरएसएस की ISIS से तुलना कर चुके हैं| तो मेरे भी मन में जिज्ञासा थी की आखिर यह आरएसएस वाले अपने कार्यक्रमों में किस तरह से नफरत और अराजकता फैलाते है यह भी देख लिया जाये|

कार्यक्रम शाम 6-8 का था तो मैं समय से ठीक 06:15 पर पहुँच गया| हैरानी हुई देख कर की कार्यक्रम शुरू हो चुका था| RSS वाले काफी समय से चलने वाले निकले| संचालन और वयवस्था सब संघ के लोग बहुत स्फूर्ति से कर रहे थे| मुझे बुलाने वाले मित्र तो बैंड के मुख्य-संचालक थे पर मेरे बैठने का प्रबंध करना वो भूले नहीं थे| जैसे ही मैंने अपना स्थान ग्रहन किया आस-पास बैठे 2-3 लोगों ने मुझे पहचान लिया| “आप वही वीडियो वाले सरदारजी है न, जो अक्सर कार में बैठ कर वीडियो बनाते है?” आज कल मुझे इस प्रश्न का सामना अक्सर करना पड़ता है सर्वजनिक स्थलों पर|

बैंड सुन्दर धुनें बजा रहे थे| बैंड बजाने वाले स्वंय सेवको की संख्या रही होगी कुछ 500-700 के बीच में| उनको अच्छी तरह से अनुपात में खड़ा देख अपने स्कूल की याद आ गयी| यह तरह का अनुशासन तो बस आजकल स्कूल या डिफेन्स फ़ोर्सेज़ में ही देखने मिलता है| अभी भी अपनी परंपरागत पोशाक में थे सब| इसका मतलब अभी पैंट लागू होने में वक़्त है|

देखते ही देखते आधा-घंटा बीत गया| सुन्दर धुनों के बाद समय था उस दिन के वक्ताओं का| और मैं भी चौक्कना हो गया की अब आएगी असली बात सामने जब यह आरएसएस वाले ज़हर उगलती बातें बोलेंगे|

पहले बारी थी प्रोफेसर पी डी सहारे की| उन्होंने बाबा साहेब के बारे में बोलना शुरू किया| उनकी ज़िन्दगी, उनकी यात्रा, उनके द्वारा देखे गए मुश्किले वगैरह| २०-२५ मिनट बोले वह लेकिन एक बात भी भड़काऊ नहीं, एक बात भी विचलित करने वाली नहीं| एक बात भी ऐसी नहीं जिससे दलित बनाम उच्च-जाति की बात सामने आये| उनकी बातें सुन के समझ आया के बाबा साहेब आंबेडकर तो एक अखण्ड भारत, एक श्रेष्ठ भारत का सपना देखते थे| उनके मन में कोई रोष नहीं था, बल्कि उनके विचार तो इस ऊंच-नीच के भेद भाव को खत्म कर के एक नए समाज की संरचना करने के थे|

प्रोफेसर ने जो सब बातें की मैं बहुत निराश हो गया की एक बात भी भड़काऊ नहीं, एक बात भी अराजकता फैलाती हुई बात नहीं| मुझे तो ऐसा कुछ ‘मसाला’ मिला ही नहीं जैसा ग़ुलाम नबी आज़ाद जी ने, इरफ़ान हबीब साहब ने बोला था|

पर मैं अभी भी आशावान था क्योंकि अगले वक्ता थे डॉ. कृष्ण गोपाल, जो की आल-इंडिया जॉइंट जनरल सेक्रेटरी है आरएसएस के| यह थे ‘असली संघी वक्ता’ उस दिन के| मैं तयार था, उन्होंने बोलना शुरू किया|

सब से पहले उन्होंने बताया की डॉ. आंबेडकर को जितना जाना जाता है बहुत की कम जाना जाता है| और सब से दुखद बात तो यह है की जितना जाना जाता है वो सही आकलन से नहीं जाना जाता| बहुत सारे तथ्य तो उनकी सोच के बिलकुल विपरीत है जैसे की वह अक्सर चित्रित किये जाते है|

उन्होंने यह भी बताया के आज जो कन्हैया जैसे लोग ‘जय भीम जय भीम’ चिल्लाते फिर रहे है वो यह भी जानते की आंबेडकर तो अपने को कट्टर दुश्मन करार चुके थे कम्युनिज्म का| उनके अनुसार तो कम्युनिस्ट अपने अलग-अलग स्वार्थों के लिए मज़दूरों का ही शोषण कर रहे थे| बाबा साहेब के अनुसार मालिक, श्रमिक एवं सरकारें अलग-अलग नहीं अपितु एक दूसरे के पूरक हैं|

यह बातें सुन कर मैं दंग था, क्योंकि यह बातें आज भी कितनी प्रासंगिक है| कम्युनिस्टों ने किसका भला करा है भला इतने सालों में? आज पश्चिम बंगाल व्यापार के मामले में कितना पिछड़ गया| कोलकाता जो कभी इतना फलता-फूलता केंद्र था व्यापार का आज कहाँ है?

फिर डॉ. कृष्ण गोपाल ने बताया की बाबा साहेब देश की स्वतंत्रता को ले कर बहुत चिंतित थे| कश्मीर को ३७० अनुछेद देने के प्रति उनकी अनिच्छा, चीन से देश को खतरा, देश को किस तरह के लोग चलाएंगे इतियादी ऐसी बातों पर आंबेडकर अपनी राय काफी बेबाकी से रखा करते थे|

बाबा साहेब ने इस्लाम या ईसाई धर्म ना अपना कर बौद्ध धर्म क्यों अपनाया इसके पीछे भी उनकी सोच देश के प्रति मौलिक तत्व-ज्ञान से जुड़े रहने की ही थी| यहाँ यह बताना ज़रूरी है के आंबेडकर के पास पोप और निज़ाम के प्रस्ताव भी थे उनके धर्म में आने के लिए, पर चुना उन्होंने बौद्ध धर्म ही| सोच यहाँ भी देश की ही थी|

तो आंबेडकर के बारे में जो यह नई बातें पता चली उससे तो मैं अभिभूत था ही, साथ ही यह सोच रहा था की अगर आंबेडकर जैसी हस्ती के बारे में इतनी भ्रान्ति है, तो अपने देश में तो इतने महापुरुष हैं उनके बारे में कितनी भ्रांतियां होंगी|

डॉ. कृष्ण गोपाल ने अपनी बात १ घंटे के आस पास रखी, पर एक भी जगह कोई भी बात किसी धर्म विरोधी, अराजकता फैलाती या नफरत फैलाती नहीं थी|

मैं हैरान था, परेशान भी था की ग़ुलाम नबी आज़ाद जी की बात मानूं की RSS और ISIS एक बराबर है, या जो मैं यहाँ देख रहा हूँ, सुन रहा हूँ, देश के प्रति सच्ची भावना वाली बातें, देश को एक करने वाली बातें, उनको मानूँ?

हो सकता है डॉ. कृष्ण गोपाल ने भांप लिया होगा की आज सरदार रविजोत सिंह आया है हमारी नफरत फैलाती बातों को सुनने और फिर उस पर वीडियो बनाने के लिए| हो सकता है मेरे मित्र ने उन्हें पहले ही यह बता दिया होगा| तो उन्होंने मंच से ऐसी कोई बात ही नहीं की| तो अगली बार जब भी आरएसएस के कार्यक्रम में जाऊंगा बिन बताये जाऊंगा ताकि उनकी ‘असलियत’ सामने आ सके 🙂

पर तब तक के लिए तो मेरे लिए to RSS और ISIS एक बराबर नहीं हैं| ग़ुलाम नबी आज़ाद जी, इरफ़ान हबीब साहब, सही नहीं पकड़े हैं!

  • रविजोत सिंह, वीडियो ब्लॉगर

(मेरे राष्ट्रीयता पर वीडियो आप देख सकते हैं youtube.com/rajosi)

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