जानिए पीएम मोदी की अगुवाई में राजस्थान में भाजपा विजय के पीछे कौन है वो व्यक्ति जिसने संगठन सशक्त कर ध्वस्त किया गहलोत का दुर्ग

आज से करीब 6 महीने पहले 11 दिसंबर 2018 को राजस्थान मे भाजपा को विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। जिस भाजपा को राजस्थान में कभी अपार बहुमत मिला था, वही पार्टी लोकसभा चुनावों से महज 6 महीने पहले, एक स्पष्ट हार का सामना कर रही थी। एक तरफ जहां इस हार से भाजपा निराश व उदास थी कांग्रेस पार्टी इसे अपनी बड़ी सफलता मान रही थी।

राजनीतिक पंडितो का भी यह मानना था कि राजस्थान मे कांग्रेस के सत्ता पर काबिज होने के बाद लोकसभा में भी इस प्रदेश से उन्हे ही फायदा होगा। लेकिन सभी कयासों को धराशायी करते हुए जब गुरुवार को लोकसभा चुनावो के नतीजे सामने आए तो उन्होंने सबको हैरान कर के रख दिया। जिस भाजपा को देखकर महज 6 महीने पहले ऐसा लगा रहा था कि उसे राजस्थान की जनता ने नकार दिया है, वही भाजपा लोकसभा चुनाव आते आते प्रदेश के सभी 25 सीटें जीत रही थी। अब सवाल यह है कि आखिर इन 6 महीनो मे ऐसा क्या हो गया कि भाजपा ने लोकसभा के परिप्रेक्ष्य में राजस्थान पर दोबारा कब्जा जमा लिया? ऐसा कौनसा चमत्कार हो गया तथा क्या कारण है कि इस अभूतपूर्व प्रदर्शन के पीछे?

यूँ तो इस परिणाम के पीछे कई छोटे बड़े कारण हो सकते हैं परंतु सबसे मुख्य कारणों मे से एक है राजस्थान प्रदेश में भाजपा के संगठन मंत्री श्री चंद्रशेखर। करीब आठ सालो तक रिक्त रहने के बाद 2017 मे राजस्थान भाजपा के संगठन मंत्री का पद सांगठनिक कार्यों में कुशल इन नेता को सौंपा गया। उस समय श्री चंद्रशेखर के सामने प्रथम चुनौती 2018 के विधानसभा चुनाव थे। ये वही चंद्रशेखर थे जिन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए 2014 मे वाराणसी से कार्य किया था लेकिन अब इनके सामना एक नई कठिन चुनौती थी। बिना समय गंवाये चंद्रशेखर जी अपने नए कर्तव्यों का निर्वहन करने मे जुट गए।

नगर नगर, गांव गांव, इलाके इलाके और बूथ बूथ तक स्वयं जाकर संगठन को मजबूत बनाने के कार्य में लग गए। खुद जा जा कर हर छोटे से छोटे कार्यकर्ता के साथ बैठ कर रणनीति बनाई। पर इतना सब कुछ करने के बाद भी विधानसभा चुनावों में मनोवांछित फल प्राप्त नही हो सका भाजपा को। हालाँकि यह भी सच है कि जब अधिकतर राजनीतिक पंडित राजस्थान विधानसभा चुनावों में भाजपा को 35 से अधिक आसन देने को तैयार नहीं थे, पार्टी ने 73 सथानो पर विजय प्राप्त की। एक तरह से उन्हे जो भी अल्प समय प्राप्त हुआ था उसमे चंद्रशेखर ने राजस्थान में भाजपा की नैया लगभग पार लगा दी थी, बस कुछ सीटों से चूक गए।

जहां कइयों के लिए विधानसभा के नतीजे निराशाजनक थे तो वहीं चंद्रशेखर जी ने इसे एक चुनौती के तौर पर लिया। पर्दे के पीछे से काम करना पंसद करने वाले चंद्रशेखर की अगुवाई में प्रदेश भाजपा बैठ कर हार का दुख मनाने के समय बर्बाद करने के बजाय, दुगनी मेहनत से अपने काम पर लग गई ।

एक तरफ जहां चंद्रशेखर जी ने युवा पीढ़ी से नए कार्यकर्ता जोड़े तो वहीं पुराने अनुभवी नेता जो कि कुछ कारणों से रुठे थे, उन्हे भी मनाकर वापिस लाए। और इस प्रकार एक सशक्त संगठन का निर्माण राजस्थान में किया।

ऐसा कहते हैं ईश्वर भी उसकी मदद करता हैं जो स्वयं अपनी मदद करते हैं। अपने अथक परिश्रम के बल पर चंद्रशेखर जी ने राजस्थान की सभी सीटें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के झोली में ला कर डाल दिया। यह नतीजे अपने आप में ऐतिहासिक इस कारण से भी हैं क्योंकि इससे पहले कई पंडितों का मानना था कि राजस्थान से लोकसभा चुनावों में वही पार्टी अच्छी प्रदर्शन करती है जो कि उस समय राज्य के सत्ता पर काबिज होती है। इस बार यह धारणा टूट कर चूर चूर हो गई। अब राजस्थान के यह चौकाने वाले नतीजे कोई चमत्कार है या एक कर्मयोगी के अदम्य पुरुषार्थ का शाश्वत फल, यह तो देखने वाले के दृष्टिकोण पर निर्भर करता है।

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