मिलिए जोधपुर के सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत से जिन्हे लोग मानते हैं एक अद्वितीय नेता

भारतीय लोकतंत्र बहुत विशाल और विविधतापूर्ण हैं। जितनी विविधता हमारे लोकतंत्र में दिखाई पड़ता है उतनी ही विविधतापूर्ण हमारे नेता भी है। कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैले भारत में दिखते हैं तरह तरह के नेता। पर इनमें से बस कुछ ही होते हैं जिन्हे आम जनता का अपार स्नेह प्राप्त होता है। ऐसे ही एक नेता है जोधपुर के सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत।

सरकारी अफसर पिता के घर जन्मे गजेन्द्र का बचपन काफी भागदौड़ पूर्ण रहा क्यूंकी पिताजी को काम के सिलसिले में हमेशा एक जगह दूसरी जगह जाना पड़ता। गजेन्द्र का राजनीति में पदार्पण तब हुआ जब वह जोधपुर के जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे थे। इसी दौरान वह विश्वविद्यालय के छात्र संघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए वो भी सबसे अधिक मतो से। बात स्पष्ट थी, युवा गजेन्द्र मे राजनीतिक गुण अल्प आयु से ही था। परन्तु गजेन्द्र सिंह शेखावत मे राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की कमी ही थी, उनमे तो बस देश और प्रदेश की जनता की सेवा करने की प्रबल आकांक्षा थी।

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद गजेन्द्र सिंह सामाजिक कार्यो में लग गए। स्वदेशी जागरण मंच और सीमा जन कल्याण समिति जैसे संगठनों से जुड़े रहे गजेन्द्र। इसी दौरान उन्होंने सीमांत क्षेत्रों के निवासियों के लिए कई महत्वपूर्ण काम किए। भारत-पाकिस्तान सीमा पर 40 स्कूल और चार छात्रावास स्थापित करके नागरिक सुरक्षा के प्रभाव को आगे बढ़ाने में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था।

राजनीति में गजेन्द्र सिंह शेखावत का सफर जरूर बहुत लम्बा न हो पर ऐतिहासिक अवशय रहा है। अशोक गहलोत का गढ़ कहे जाने वाले जोधपुर से पहली बार चुनाव लड़ते हुए गजेन्द्र सिंह शेखावत ने २०१४ में ऐतिहासिक मार्जिन से विजयी हुए थे।

आज गजेन्द्र सिंह शेखावत की ख्याति देश विदेश में फैल रही है। पर जोधपुर की जनता के लिए वह आज भी उनके गज्जु बन्ना ही है। न कोई अहभ न सांसद होने का कोई रुतबा। आज भी गजेन्द्र सिंह शेखावत ऐ ऐसे हैं जैसे जोधपुर का हर घर उनका अपना ही हो.

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