अगर गांधी को इतना सम्मान, तो छत्रपति शिवाजी महाराज को क्यों नहीं?

ऊपर दी हुई पंक्ति महान कवि भूषण द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज के दरबार में जब कहीं गई तो सारे दरबारी झूम उठे|

राक्षसों के ऊपर जिस तरह इंद्र का शासन है, रघुकुल के महानायक राजा रामचंद्र का जिस तरह से दुष्ट रावण पर प्रहार है, जिस तरह से जंगल में घूमने वाले अन्य जंगली जानवरों पर शेर का प्रहार है, और पापी रावण पर जिस तरह से कान्हा का राज है, ठीक उसी तरह मलिच्छ दुराचारी पापी मुगल शासकों के ऊपर हमारा शेर शिवराज का राज है| इस तरह से कवि भूषण ने हिंदवी स्वराज्य के स्थापना करने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज का वर्णन किया| अगर आप यह सोच रहे हैं कि कवि भूषण पुणे सातारा या महाराष्ट्र के किसी गांव के निवासी थे तो आप गलत हैं। 1670 में शिवाजी महाराज का इस तरह से वर्णन करने वाले कवि भूषण अयोध्या के निकट एक गांव के निवासी थे| अब आपको यह अंदाजा लग गया होगा कि औरंगजेब के शासन में भी शिवाजी महाराज की कृति केवल महाराष्ट्र में ही नहीं परंतु मध्य एवं उत्तर भारत में भी अच्छी खासी थी|

जिस वक्त शिवाजी जन्मे थे तब देश में हर तरफ मुस्लिम शासकों का राज था और हिंदुओं की सुरक्षा पर और संस्कृति पर काफ़ी खतरा मंडरा रहा था| जहां एक तरफ दिल्ली और उत्तरी भारत में कट्टरवादी इस्लाम को मानने वाले मुगल शासक थे तो दूसरी तरफ ढक्कन के इलाकों में आदिलशाह और निजाम शाह की हुकूमत चलती थी| शिवाजी के पिता जी शहाजी आदिलशाह के हुकूमत के एक सिपहसालार थे| इसीलिए उन्हें जागीर मिली हुई थी|

शिवाजी चाहते तो उस जागीर पर राज्य करते हुए बाकी के अन्य लोगों की तरह मुस्लिम शासकों के सामने अपना सर झुका कर आम जनमानस पर होते हुए ज़ुल्मों को अनदेखा कर देते और एक अय्याश वाली जिंदगी बिता सकते| परंतु मात्र 16 साल की उम्र में उनको यह समझ आ गया कि देश के हालत और आम जनमानस किस तरह से आदिलशाह निजाम शाह और मुगल शासकों से त्राहिमाम हो चुकी है, इसलिए उन्होंने हिंदवी स्वराज स्थापित करने का प्रण लिया| तोरणा किले कि फतेह से इस हिंदवी स्वराज्य की शुरुआत हुई, फिर चाहे अफजल खान हो या सृष्टि खान या खुद क्रूर मुगल सम्राट औरंगजेब| ऐसा कोई भी योद्धा या महाराजा नहीं जिसे शिवाजी ने शिकस्त ना दि हो|

एक समय ऐसा भी आया जब औरंगजेब ने छल से शिवाजी को आगरा में कैद कर लिया| परंतु अपनी विवेक और पराक्रम का इस्तेमाल करते हुए शिवाजी औरंगजेब की आंखों में धूल झोंककर शत्रु की कैद से आजाद हो गए| कई लाखों की बल संख्या वाले औरंगजेब की सेना ने कई कोशिशों के बावजूद कभी शिवाजी को वापस नहीं पा सकी और ना ही मराठा साम्राज्य को अपना बना सकी| कुछ हजारों की संख्या में यह मराठा शिवाजी के नाम से ही इतने उत्साहित रहते थे कि उनके लिए अपनी जान तक निछावर करने को तैयार थे| क्योंकि शिवाजी में उन्हें एक ऐसा भगवान दिखता था जिसने भारत भूमि पर होने वाले दुष्ट ताकतों का नाश कर सकता है| एक बार औरंगजेब के एक करीबी मंत्री ने भी उसे यह बात कही कि “महाराज आप शिवाजी को कैद करने के सपने अब भूल जाइए और मराठा साम्राज्य को भी भूल जाइए यह आपसे मुमकिन नहीं है” |

क्रूर घमंडी औरंगजेब को यह बात जिंदगी भर खलती रही| अपने अंतिम दिनों में औरंगजेब ने क्या बात लिखी है कि हाथ में आए शत्रुओं को कभी जीवित नहीं छोड़ना चाहिए, यह वाक्य उसने शिवाजी के संदर्भ में कही| यह शिवाजी के पराक्रम और साहस की ही प्रेरणा लेकर मराठा शासन दिल्ली में भी अपने पैर जमा चुका था| आज आप यह बात माने चाहे नहीं माने परंतु दुनिया भर में प्रख्यात औरंगजेब की सेना को अगर किसी के नाम से पसीने छूट गए थे तो वह शेर शिवाजी थे| जिस वक्त हिंदुओं की संस्कृति और भोली भाली जनता की आन बान और शान दांव पर लगी हुई थी उस समय शिवाजी एक अवतार बनकर भारत की इस भूमि पर प्रकट हुए| एक तरफ जहां मुझे शिवाजी के नाम और उनकी जीवनी सुनते ही मन में जोश आ जाता है तो दूसरी ओर यह बात मुझे हमेशा खलती रहेगी कि जिस जननायक ने मुस्लिम दुराचारी राजाओं से हमारी रक्षा की आज उसे हम इतना सम्मान भी नहीं दे पा रहे हैं|

घटिया राजनीति के चलते 1947 में देश के बटवारे हो गए| और हमने गांधी को महात्मा का टाइटल देकर उनके जन्म जयंती पर राष्ट्रीय अवकाश मनाने लगे| धर्म के आधार पर देश का बंटवारा करने वाले गांधी कब से इतने महान हो गए? और हर धर्म का सम्मान करने वाले और विपरीत परिस्थितियों में भी हिंदवी स्वराज्य को स्थापित करने वाले श्री छत्रपति शिवाजी महाराज इनके जन्म जयंती पर देश भर में अवकाश क्यों नहीं? यहां हमें हमारी छोटी मानसिकता और सेक्युलर सोच से ऊपर उठकर इस बात को स्पष्ट रूप से जान लेनी चाहिए कि कुछ लोगों ने सिर्फ मुस्लिम तुष्टिकरण करने के लिए एक गांधी को महात्मा बना दिया, और दूसरी तरफ पूरे भारतवर्ष कि गौरव एवं जननायक शिवाजी महाराज को मात्र एक महाराष्ट्र का नायक माना जाता है|

क्या आज भारत सरकार को और देश के युवाओं और नई पीढ़ी को इस बात पर मंथन नहीं करना चाहिए कि अगर गांधी ने देश को ब्रिटिश शासकों से आजादी दिलाई और महान हो चुके हैं, तो देश को मुगल शासकों से आजादी दिलाने वाले छत्रपति शिवाजी महाराज को उतना ही सम्मान क्यों नहीं?

जय भवानी जय शिवाजी

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