प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरों पर उद्धव ठाकरे का निशाना, ‘लगता है उनका ध्यान सिर्फ दूसरे देशों पर है’

शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर भी प्रहार किया और कहा कि ऐसा जान पड़ता है कि उसका ध्यान बस दूसरे देशों पर ही है।

इसके साथ ही ठाकरे ने दावा किया कि यदि उनकी पार्टी ने 2014 में बीजेपी का समर्थन न किया होता तो वह महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए विपक्षी कांग्रेस और राकांपा को तोड़ने समेत सारी तरकीबें अपनाती।

अपने सहयोगी दल पर फिर प्रहार करते हुए ठाकरे ने कहा कि बीजेपी ने देश के लोगों के साथ धोखा किया जिन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में उसे वोट दिया।

उन्होंने कांग्रेस और पिछली यूपीए सरकार के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगाने को लेकर भी बीजेपी पर प्रहार किया और कहा कि यदि भ्रष्टाचार हुआ है तो ‘दूसरों पर बस कीचड़ उछालने’ के बजाय उसे साबित भी किया जाना चाहिए।

ठाकरे ने कहा, ‘यदि हमने सरकार में भागीदारी नहीं की होती तो बीजेपी जिस तरह हर तरीकों का इस्तेमाल कर राज्यों को जीतती जा रही है…जैसे इसने त्रिपुरा में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस को तोड़ दिया, उसी तरह यह महाराष्ट्र में सत्ता में आने के लिए कांग्रेस और राकांपा को तोड़ देती।’

उन्होंने शिवसेना के मुखपत्र सामना में साक्षात्कार के दूसरे हिस्से में कहा, ‘ऐसा होने देने की जगह मैंने अपने लोगों को सरकार में काम करने का अनुभव लेने की अनुमति दी।’ शिवसेना राज्य और केंद्र में बीजेपी नीत सरकारों में घटक दल है।

यह पूछे जाने पर कि उन्हें महाराष्ट्र में चार साल तक सत्ता में रहने से क्या मिला, ठाकरे ने कहा कि सरकार में शिवसेना के मंत्रियों को प्रशासनिक कार्य का अनुभव मिला। उन्होंने कहा, ‘एक तरह से यह सरकार चलाने का अभ्यास है। क्या किया जाना चाहिए, क्या नहीं किया जाना चाहिए।

इसके साथ ही यह भी कि योजनाओं को किस तरह क्रियान्वित किया जाना चाहिए।’ उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के लोगों ने शिवसेना को छोड़कर बाकी सभी दलों की सरकारों का अनुभव किया है।

ठाकरे ने कहा, ‘सत्ता तब (शिवसेना के हाथों में) आएगी जब लोग ऐसा फैसला करेंगे, लोग अब तक सभी अन्य दलों को देख चुके हैं, लेकिन उन्होंने केवल शिवसेना को ही सत्ता में नहीं देखा है। इसीलिए मैंने अपने लोगों को सत्ता में रहने का अनुभव लेने दिया.’ एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि शिवसेना संस्थापक दिवंगल बाल ठाकरे ने अपनी पार्टी बनाने के लिए कभी किसी पार्टी को नहीं तोड़ा।

उन्होंने कहा, ‘यह शिवसेना के रुप में गठित हुई थी और अब भी वही है. उसने (शिवसेना ने) कभी अपना नाम, अपने नेता और निशान नहीं बदले. शिवसेना को बनाने के लिए किसी अन्य दल को नहीं तोड़ा गया।’

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