जानिए किस वजह से सत्ता के मद में अंधे वैभव गहलोत हारेगें जोधपुर में चुनाव

चुनावी डेस्क- लोकसभा चुनाव के चौथे चरण के तहत राजस्थान की 13 लोकसभा सीटों पर मतदाता 29 तारीख को होना है। इस चरण में सबसे अहम सीट के तौर पर जोधपुर लोकसभा सीट है।

क्योंकि मोदी सरकार के कद्दावर मंत्री गजेंद्र सिंह बनाम गहलोत पुत्र वैभव के बीच मुकाबला है। ऐसे में दोनों सियासी धुंरधरों की साख दांव पर है। लेकिन वैभव ओर गजेंद्र सिंह में तुलना की जाए तो गजेंद्र सिंह खासे मजबूत नजर आते है।

अनुभव-अनुभवहीन- जहां गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे है। साथ ही संघ ओर अनुषागींक संगठनों में लगातार सक्रिय रहे है। ओर अब तो मोदी सरकार में बतौर मंत्री खासे लोकप्रिय ओर मंझे हुऐ नेता साबित हूऐ है। वही वैभव के पास पिता की राजनैतिक विरासत के अलावा कोई खास अनुभव नहीं।

समर्पित कार्यकर्ता-राजकुमार- गजेंद्र सिंह शेखावत की छवि एक मिलनसार ओर प्रखर वक्ता के रूप में है। हर व्यक्ति शेखावत से आसानी से घुलमिल जाता है। वही वैभव सीएम पुत्र होने के कारण कई प्रोटोकॉल से घिरे है। ऐसे में वैभव की छवि एक अंहकारी राजकुमार की है।

जोधपुर के आम लोगों में इन दिनों यह चर्चा आम है, कि वैभव गहलोत ने सिर्फ चुनाव जीतने के लिए सादगी ओर नम्रता का चोला ओढ़ लिया है। चुनाव होते ही अपने पुराने अंहकारी युवराज के रुप में आ जाऐगे। इस बार का जोधपुर लोकसभा चुनाव हाई-वोल्टेज रहने वाला है। दोनों दल जी-जान से जुटे है।

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