शिक्षा नगरी कोटा में कौन आगे और कौन पीछे, किसकी बनेगी सरकार? जानिए

राजस्थान की चुनावी फिजाओं में चंद घंटों बाद वोटिंग होगी और उसके बाद सबकी निगाहें नतीजों पर होगी। लेकिन अभी सभी की उत्सुकता यह जानने मे है कि शिक्षा नगरी के नाम से प्रसिद्ध कोटा जिले की सीटों पर कौन जीत रहा है।

कोटा दक्षिण सीट से बीजेपी ने फिर से संदीप शर्मा पर दावं खेला है। संदीप शर्मा अपने विकास कार्यों के बलबूते पर फिर से यहां पर ताल ठोकते नजर आ रहे हैं। उनके सामने है कांग्रेस की प्रत्याशी राखी गौतम। संदीप शर्मा की एक विकास पुरुष की छवि के आगे राखी गौतम कहीं ना कहीं अपनी पार्टी के आपसी कलह की वजह से कमजोर नजर आ रही है।

कोटा उत्तर बीजेपी के फायरब्रांड नेता प्रहलाद गुंजल का कोई मुकाबला नहीं है, जातिवाद से मुक्त राजनीति करने वाले प्रहलाद गुंजल अपने विकास के बलबूते पर शांति धारीवाल से कई गुना मजबूत नजर आ रहे हैं। पिछले दिनों तमाम जितने उनके कार्यक्रम हुए हैं, वहां जिस तरह जनसैलाब उमड़ रहा है, वह शांति धारीवाल के मुकाबले कई गुना ज्यादा है, और इस बात को लेकर धारीवाल खासे परेशान है।

लाडपुरा सीट पर बीजेपी प्रत्याशी कल्पना सिंह की और मनोवैज्ञानिक रूप से यहां वोटों का ध्रुवीकरण होगा, क्योंकि कांग्रेस ने मुस्लिम प्रत्याशी उतारा है, और यहां पर भी कांग्रेस बैकफुट पर नज़र आ रही है।

सांसद, बीजेपी ने यहां पर स्थानीय लोकप्रिय प्रत्याशी के तौर पर हीरालाल नागर को फिर से मैदान में उतारा है। वही कांग्रेस के प्रत्याशी भरत सिंह अपनी पहली ही पार्टी केलोगों के टिकट कटने की नाराजगी को पाटने में नाकामयाब रहे है।

रामगंजमंडी से बीजेपी के कद्दावर नेता संघ की मजबूत पृष्ठभूमि से आते है, और लगातार अपने विकास के जरिए आमजन मे पहचान रखने वाले मदन दिलावर यहां पर खासे आगे नजर आ रहे हैं। क्षेत्र में उनका आम जनमानस से सीधा लगाव है, इस बात का उनको सीधा फायदा मिलता नज़र आ रहे है। कांग्रेस के प्रत्याशी रामगोपाल बेरवा यहां पर अपनी पार्टी की गुटबाजी के चलते हुए, पिछडते नजर आ रहे हैं।

जहां कोटा में बीजेपी बूथ से लेकर सोशल मीडिया तक खासी मजबूत है, और सांसद ओम बिरला का क्षेत्र में प्रभाव के चलते यहां बीजेपी, कांग्रेस के मुकाबले खासी मजबूत नजर आ रही है।

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