क्या डर है ममता बनर्जी को “जय श्री राम” के नारे से?

“जय श्री राम” से दिक्कत है ममता बनर्जी को? यह प्रश्न उस समय उठा जब एक हैरान कर देने वाला विडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया । विडियो में देखने को मिल रहा है ममता के गुजरते काफिले के समय रास्ते के किनारे खड़े कुछ लड़के “जय श्री राम” के नारे लगा रहे हैं। अचानक ममता की गाड़ी रुकती है और मुख्यमंत्री गुस्से से आग बबूला उतरती है।

मुख्यमंत्री को इतने गुस्से में देख नारे लगाने वाले लड़के भागने की कोशिश करते हैं पर ममता उन्हे उँगलियों से इशारा कर बुलाती है और कहती हैं कि लड़के बदसलूकी कर रहे हैं। इसके बाद उन लड़को को हिरासत में ले लिया जाता है।

इस घटना ने कई बड़े सवाल उठा दिये हैं। क्या पश्चिम बंगाल में अब “जय श्री राम” कहना अपराध है? चुकी कोई राजनीतिक या सामाजिक दल किसी नारे का प्रयोग करता है तो क्या उस नारे का ही बहिष्कार करना होगा? कई आतंकवादी संगठन “अल्लाह हु अकबर” का प्रयोग करते हैं। ऐसे ही कई खालिस्तानी संगठन “सत श्री अकाल” का भीड़ प्रयोग करते हैं। तो क्या इन नारो को विशेष दल या संगठन से जोड़ कर देखना ठीक होगा? उत्तर है कतई नहीं। तो “जय श्री राम” मे ऐसा क्या अलग है?

ऐसा क्यूँ है कि यह नारे कान पर पड़ते ही ममता ने मान लिया की वह लड़के उनके राजनितिक विरोधी है? ममता स्वयं कहती हैं कि उनकी पार्टी सब देवी, देवता और मजहबो को मानती हैं। अगर ऐसा है तो क्या कोई तृणमूल कांग्रेस का व्यक्ति “जय श्री राम ” नही कह सकता? या फिर डर इस बात का है कि अगर बंगाल की गली गली से जय श्री राम के नारे लगने से वोट बैंक खफा हो जायेगा? सवाल है और सवाल उठेंगे।

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