जानिए क्यों राजस्थान में सीमा सुरक्षा के लिए मोदी सरकार है ज़रूरी

आतंकवाद आज देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण मुद्दों मे से एक बन गया है। आए दिन पाकिस्तान के तरफ से आतंकी सीमा अतिक्रमण कर भारत में हमले चलाने के फिराक में लगे रहते हैं। इन आतंकवादियों से वस्तुतः पुरे देश को खतरा तो रहता ही है पर सबसे ज्यादा खतरा उन लोगों पर मंडराता है जो सीमांत राज्यो के निवासी हैं।

सीमांत राज्यो के बारे में सोचने पर स्वतः ही दिमाग में पंजाब और जम्मू कश्मीर जैसे राज्यो के नाम आते हैं, और लोग एक ऐसे राज्य को भुल जाते हैं जिसके साथ एक बहोत लम्बी सीमा पाकिस्तान साझा कर रहा है। हम राजस्थान की बात कर रहे हैं।

राजस्थान-पाकिस्तान सीमा एक बहोत बड़े भुभाग मे फैला हुआ है। चारो तरफ रेगिस्तान और शरीर गला देनी वाली गर्मी के कारण इस सीमा की सुरक्षा अपने आप मे एक बहोत बड़ी चुनौती है। जब भी उत्तरी सीमाओं पर सेना और सुरक्षा बलों की ज्यादा तैनाती होती है तब आतंकवादी इस फिराक में रहते हैं कि किसी तरह राजस्थान के रास्ते भारत में दाखिल हो जाये।

हालांकि मजे की बात है कि इतना सम्वेदनशील सीमा होने के बावजूद भी राजस्थान के विगत सरकारो ने अपने तरफ से ज्यादा कुछ करने के प्रयास कभी नहीं किए और सब कुछ केंद्र के ऊपर ही छोड़ दिया। हां, वसुंधरा राजे के कार्यकाल में इस विषय पर कुछ काम जरूर हुए पर अब कांग्रेस सरकार मे फिरसे सीमा सुरक्षा वाले विषय को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

अब जैसे जैसे लोकसभा के चुनाव नजदीक आ रहे हैं वैसे वैसे सीमा सुरक्षा का मुद्दा भी दोबारा गरमा रहा है। राजस्थान मे कई ऐसे संसदीय क्षेत्र है जो सीमाओं से लगे हुए हैं। इन क्षेत्रों में सीमा सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। ऐसे में अगर जानकारों की मानें तो आगामी लोकसभा चुनावों में जोधपुर जैसे सीमांत सीट से भाजपा के प्रत्याशी गजेन्द्र सिंह शेखावत का जीतना ही सबके फायदे मे होगा।

गजेन्द्र सिंह शेखावत एक लम्बे समय तक राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए सफलता पुर्वक काम करते रहे हैं। सीमा जन कल्याण समिति के तरफ से काम करते हुए शेखावत ने अकेले ही ४० से अधिक स्कुल भारत-पाक सीमा पर खुलवाए थे। सीमाओं पर काम करने के लम्बे अनुभव और सीमांत नागरिकों के कठिनाईयों से भलीभांति अवगत होने के कारण शेखावत सीमा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों का बहतर निवारण करेंगे ऐसा जानकारों का मानना है।

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