जहाँ काँग्रेस वहाँ आतंकवाद

रविवार को पंजाब में हुए आतंकवादी हमले ने देश के सामने कई गम्भीर प्रश्न रख दिये हैं। पिछले कुछ वर्षो से सोशल मीडिया एवं विभिन्न दुसरे संचार माध्यमों द्वारा खालिस्तानी विचारधारा की पंजाब में वापसी करवाने का निरंतर प्रयास चल रहा है। पंजाब का हर एक निवासी इस बात को कई सालों से महसूस कर रहा है। कहीं न कहीं फिर पंजाब के हवाओं में देश विरोधी तथा कट्टरपंथ के जहर को घोला जा रहा है।

सवाल यह है कि सब कुछ जानते समझते हुए भी पंजाब सरकार ने कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाए? क्या कैप्टन अमरिंदर कि सरकार किसी ऐसे ही दुर्घटना का इंतजार कर रही थी? दरअसल इस हमले ने एक तरह से कांग्रेस पार्टी के सीमावर्ती राज्यों में शासन करने के क्षमता पर ही एक बहोत बडा़ सवालिया निशान लगा दिया है। एक ऐसे समय में जब कांग्रेस पार्टी एक और सीमावर्ती राज्य, राजस्थान पर फतह करने के ख्वाब देख रही है तब राहुल गांधी या उनकी पार्टी ईन सवालो से बच नहीं सकते।

जो राज्य सीमा से लगे हुए हैं और खास कर पाकिस्तान से लगे हैं, उनकी सरकारों से यह अपेक्षा होती है कि वह दुसरे राज्यों के तुलना में अधिक चौकन्ने और मुस्तैद रहेंगे। अभी कुछ ही दिनों पहले यह हाई अलर्ट जारी हुआ था कि पंजाब में अल-कायदा कमांडर जाकिर मुसा को देखा गया है कुछ और लोगों के साथ। ऐसे में सरकार को चाहिए था कि सबसे पहले ऐसे स्थान जहां जन समागम होता है वहां की सुरक्षा सुनिश्चित करे। ऐसा क्यों नहीं हुआ?

क्या पंजाब के बाद एक और ऐसे राज्य जिसकी सीमाए पाकिस्तान से लगती है, उस पर शासन करने के लिए कांग्रेस पर भरोसा किया जा सकता है? सवाल बहोत गंभीर है।

पंजाब की तरह ही, पाकिस्तान की नजरें राजस्थान पर भी लगी रहती है। राजस्थान की सीमा रेगिस्तान में होने के वजह से, वहां से आतंकवादियों का अंदर बाहर करना ज्यादा आसान होगा। पहले भी तस्करी और नकली नोटों के गैरकानूनी व्यवसाय से जुड़े लोग सीमा पार करने के लिए राजस्थान बार्डर को पंसद करते थे। पर पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार और केंद्र सरकार के मिले जुले प्रयासों के कारण राजस्थान सीमा पर होने वाले गैरकानूनी अतिक्रमण पर काफी हद तक रोक लगाया जा सका है।

पर क्या कांग्रेस, जो कि पंजाब में सुरक्षा के क्षेत्र में विफल नजर आ रही हैं, राजस्थान की सुरक्षा सुनिश्चित कर पायेगी? पंजाब में आक्रमण खालिस्तानीयो ने किया हो या अल-कायदा ने, दोनों के सूत्र तो पाकिस्तान से ही है।

कांग्रेस पर सवाल इस लिए भी उठने लाजमी है क्योंकि उनके अपने ही कुछ नेताओं का व्यवहार संदेहजनक है। अभी हाल ही में पुलिस ने इस बात की पुष्टि की है कि भीमा-कोरेगांव दंगों के संदर्भ में जीन नक्सलियों को पकड़ा गया था उनके यहां से बरामद कुछ चिट्ठीओ में कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह का नम्बर मिला है। दिग्विजय सिंह यह कह रहे हैं कि उनका नम्बर हर किसी के पास है, पर यह बात कुछ हजम नहीं होती। अब खबरे यह भी है कि शायद दिग्विजय सिंह से भी पूछताछ की जा सकती है।

पंजाब में हो रहे एक बाद एक दुर्घटना और आतंकवादी हमले साथ में पार्टी के बड़े नेताओं पर नक्सलियों से संपर्क रखने का आरोप, सब मिलकर अब कई लोगों को यह डर सता रहा है कि अगर कांग्रेस राजस्थान जीत गई, तो क्या होगा। क्या वहां के सुरक्षा को सुनिश्चित कर पाएगी कांग्रेस? सवाल कई है, जवाब उन्हें ही देना होगा।

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