क्या राजस्थान विधानसभा के बाद खत्म हो जाएगी गेहलोत की राजनीति ?

राजस्थान के विधानसभा चुनाव के बीच नेता एक दूसरे को लेकर बदजुबानी लगातार करते नजर आ रहे है।वहीं कांग्रेस की आपसी कलह बंद कमरे से निकल कर अब बाहर भी आ गई हैं।अशोक गहलोत से लेकर सचिन पायलट,रामेश्वर डुडी और गाहे-बगाऐ सीपी जोशी राजस्थान के मुख्यमंत्री पद की दौड़ में खड़े नजर आ रहे है।

लेकिन सूत्रों के हवाले से खबर है कि यह चुनाव अशोक गहलोत का आखिरी चुनाव हो सकता है।लिहाजा अशोक गहलोत का सियासी सफर छात्र राजनीति से एनएसयूआई, यूथ कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी में संगठनात्मक रूप से कई पदों से होते हुऐ,संगठन के साथ केंद्र में एक बार मंत्री और राजस्थान में दो बार मुख्यमंत्री बनने का भी योग रहा है।

गहलोत का आखिरी चुनाव है यह सियासी जानकारों का कहना है कि

1.साल 2018 आते-आते गहलोत कि उम्र और स्वास्थ्य के लिहाज से राजनैतिक संन्यास ले सकते है।

2.एक तरफ पायलट और गहलोत के बीच आपसी मुख्यमंत्री बनने की जंग इस हद तक है, कि पायलट खैमा गहलोत को पटखनी दें दे।

3.गहलोत अपने बेटे वैभव गहलोत को राजनीति में आगे लाना चाहते हैं और इसलिए कांग्रेस में महासचिव पद पर उन्हें भी नियुक्त किया है।वैभव को जगह देनें के लिए गहलोत सक्रिय राजनीति से संन्यास ले सकते है।

4.सियासी जानकारों का मानना है कि राजस्थान में गहलोत को अब राजस्थान से दूर दिल्ली भेजा जा सकता है।कांग्रेस को देश भर में मजबूत करने के लिए गहलोत के अनुभव को काम में लिया जा सकता है।

5.और सूत्रों के हवाले से खबर हैं और कई दफा मीडिया में भी इशारों इशारों में सचिन पायलट ने गहलोत को राजस्थान से दूर करने के लिए कहा है।

6.राहुल गाँधी के युवाओं को मौका देनें कि योजना के चलते भी गहलोत के लिए टिक पाना मुश्किल हो सकता है।

खैर बढती उम्र और बढते प्रतिद्वंद्वीयों के चलते अब आगे गहलोत कि राह खासी मुश्किल नजर आ रही है।

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